टेक्नोलॉजी

सावधान! एक कॉल और SIM नंबर से खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट

सावधान! एक कॉल और SIM नंबर से खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट

आप लोग आमतौर पर सिम नंबर लेकर ठगी करने की घटनाओं को तो सुनते ही आ रहे होंगे. अक्सर आपको सुनने को मिल जाता होगा कि किसी ने सिम की सारी डिटेल लेकर हमारे खाते से लाखों रूपये निकालकर चपत लगा दी. आपने कभी ये भी जाना है कि आखिर ये फ्रॉड आपके साथ कोई कैसे कर जाता है. किस तरह से लोग आपके सिम कार्ड की डिटेल निकालकर आपके बैंक खाते का रूपया उड़ा लेते है. यहां हम बता रहे है कि लोग कैसे इस फ्रॉड को अंजाम दे रहे है.

क्या होती है सिम स्वैपिंग‘-

जब कोई ठग एक सिम कार्ड को नए सिम कार्ड से बदलकर ठगी करते है तो इस फ्रॉड को सिम स्वैपिंग करते हैं. सिम स्वैपिंग को सीधे तौर पर मतलब है कि आपक सिम को डुप्लीकेट सिम के साथ बदल दिया जाता है. जब कोई ठग ये काम करता है तो आपके नंबर की सिम उनके पास आ जाती है. सिम कार्ड में यूज़र का डाटा रहता है और इसका इस्तेमाल ऑथेंटिकेशन के लिए किया जाता है. ठग इसके जरिए बहुत आसानी से ठगी कर सकते हैं.

फोन कर मांगते हैं SIM नंबर-

सिम से फ्रॉड करने के लिए ठग सबसे पहले आपको नए नंबर से कॉल करते हैं और खुद को किसी टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताते हैं. इसके बाद वे कॉल ड्रॉप और इंटरनेट की समस्या के समाधान का बहाना करते हैं. इसके अलावा आपके सिम को अपडेट करने की बात कहते हैं. जब आप इनके चक्कर में फंस जाते हैं तो वे आपसे आपके सिम कार्ड के पीछे लिखे 20 डिजिट का यूनीक नंबर पूछते हैं.

1 बटन दबाते ही हो जाता है काम-

जैसे ही आप उन्हें 20 डिजिट का यूनिक सिम नंबर बताते हैं तो आपको 1 बटन दबाने को कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे सिम स्वैप करने की सहमति यूज़र से ली जाए. ऐसा करने के बाद जिस ऑपरेटर का सिम आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसे लगता है कि आप अपनी मर्जी से सिम कार्ड एक्सचेंज कर रहे हैं और सिम स्वैपिंग हो जाती है. ऐसा होने के तुरंत बाद आपकी सिम ब्लॉक हो जाता है और नेटवर्क आना बंद हो जाता है. इसके बाद ठगों के पास उसी नंबर का सिम एक्टिवेट हो जाता है.

ऐसे निकालते हैं पैसे-

अगर किसी अपराधी सिम स्वैपिंग के लिए किसी यूज़र को कॉल किया है तो ऐसा हो सकता है कि उसके पास उस यूज़र की बैंक डिटेल जैसे अकाउंट नंबर, डेबिट-क्रेडिट नंबर की जानकारी पहले से हो. लेकिन इन सबके बावजूद भी अकाउंट से पैसे निकालने के लिए ओटीपी की जरुरत होती है. अगर सिम स्वैप हो गया है तो ओटीपी भी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आ जाएगा और फिर अपराधी आसानी से बैंक से पैसे निकाल सकते हैं. इसके अलावा वे शॉपिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं. इसके अलवा ठग गई बार धोखेबाजी करने के लिए मोबाइल नंबर के साथ आधार नंबर भी मांगते हैं क्योंकि आजकल बैंक से लेकर कई सारी सेवाएं आधार से जुड़ी होती हैं.

इस धोखेबाजी से बचने के लिए ये करें-

आम तौर पर सिम स्वैपिंग की पूरी प्रकिया में थोड़ा समय लगता है मतलब आपकी सहमति के कुछ घंटे बाद आपके फोन के सिग्नल वगैरह गायब होंगे. ऐसे में ठग चाहते हैं कि आपका ध्यान फोन से हट जाए इसलिए वे आपको परेशान करेंगे ताकि आप फोन को स्विच ऑफ कर लें या साइलेंट कर लें. इसलिए ऐसे समय में कभी अपने फोन को साइलेंट या फिर स्विच ऑफ न करें. इसके अलावा अगर आपको ऐसे कॉल आते हैं तो अपने बैंक खाते पर भी निगाह रखें और संदिग्ध लेन देन होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें. कई बार ये ठग आपको इतना परेशान कर देते हैं कि आप गुस्से में आकर फोन ही बंद कर देते हैं और इसी का वे इंतजार करते हैं ताकि लेनदेन होने पर आपके नंबर मैसेज न आए और आपको कुछ पता ही ना चले. ऐसे में अपना मोबाइल किसी भी कीमत पर बंद ना करें.

Share This Post

Lost Password

Register