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हिंदू और मुस्लिम के बाद अब तीसरा पक्ष भी कर रहा है अयोध्या की विवादित जमीन पर दावा

हिंदू और मुस्लिम के बाद अब तीसरा पक्ष भी कर रहा है अयोध्या की विवादित जमीन पर दावा

अयोध्या की विवादित जमीन पर अबतक हिंदू और मुसलमान ही दावा कर रहे थे लेकिन अब इस विवादित जमीन पर एक तीसरा पक्ष भी दावा कर रहा है और वो है बौद्ध समुदाय, जिसका दावा है कि पहले एक बौद्ध स्थल था। इस दावे के साथ ही अयोध्या की जमीन को लेकर विवाद और भी तेज हो गया है।

बौद्ध समुदाय के कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यह दावा किया है कि अयोध्या की विवादित जमीन बौद्धों की है। अयोध्या के रहने वाले विनीत कुमार मौर्य का कहना है कि इस विवादित जगह पर पहले एक बौद्ध स्थल था। विनीत ने एक याचिका भी दायर किया। जिसमें कहा गया है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण से पहले उस जगह पर बौद्ध धर्म से जुड़ा ढांचा था।

जानकारी दे दें कि विनीत कुमार मौर्य का कहना है कि उन्होंने इसे बौद्ध समाज के सदस्यों की ओर से दायर किया है। इसमें विनीत ने यह दावा भी किया है कि खुदाई में किसी मंदिर या हिंदू धर्म से संबंधित किसी स्थल को तोड़े जाने के सबूत नहीं मिले थे।

विवादित जमीन के आसपास आखिरी खुदाई 2002-03 में की गयी थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस जगह खुदाई की जिसके बाद ही वो ये दावा कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने वहां 4 बार खुदाई थी।

याचिका में कहा गया है कि एएसआई की खुदाई में पता चला है कि वहां ऐसे स्तूप, दीवार और खंभे थे, जो बौद्ध विहार की विशेषताएं हैं। उनका यह भी दावा है कि जिन 50 गड्ढों की खुदाई हुई है वहां किसी भी मंदिर या हिन्दू धर्म से संबंधित ढांचे के अवशेष नहीं मिले हैं।

मौर्य ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस विवादित जगह को श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कुशीनगर और सारनाथ की तरह बौद्ध विहार घोषित करे। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद मामले पर सुनवाई तेज हो गयी है। ऐसा लग रहा है कि कोर्ट इस मामले में जल्द फैसला सुरक्षित कर सकता है।

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