इतिहास

जानिए रमजान का इतिहास, इन चीजों से रहना होता है दूर

 रमजान इंडिया टाइम टेबल 2018 1. मुस्‍लिम समुदाय का पवित्र महीना रमजान शुरू हो गया है। बुधवार को चांद दिखाई दे गया है। गुरुवार पहला रोजा रखा जा रहा है। रमजान की तैयारियां घरों में चल रही हैं। बाजार में लोग रोजा इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी कर रहे हैं। 2. इस महीने में भगवान की दी हर नेमत के लिए अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है। महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। 3. इस महीने दान पुण्य के कार्यों करने को प्रधानता दी जाती है। इसलिए इस महीने को नेकियों और इबादतों का महीना कहा जाता है। 4. इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना रमजान है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं। रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते-पीते। इसके साथ ही रमजान में बुरी आदतों से दूर रहने के लिए भी कहा गया है। रमजान में मुलमान लोग अल्लाह को उनकी नेमत के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। मह...

इस शासक से डरते थे मुगल आक्रमणकारी

भारत की इस धरती पर एक से बढ़कर एक वीर योद्धा ने जन्म लिया है। इन योद्धाओं के कारण भारत का नाम पूरे विश्व में बहुत ही इज्जत के साथ लिया जाता है। आज हम आपको भारत की वीर भूमि राजस्थान में जन्मे राणा सांगा के बारे में बता रहे हैं, जिनका नाम महाराणा संग्रामसिंह था। राणा सांगा ने राजस्थान के मेवाड़ पर 1509 से 1527तक शासन किया। राणा सांगा का जन्म सिसोदिया सूर्यवंशी राजपूतों के घर में 12 अप्रैल,1482 को मालवा में हुआ था। उनके पिता का नाम राणा रायमल था। राणा सांगा वो शासक थे, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ राजपूतों को एकजुट किया और उनका मुकाबला किया था। अगर सही मायनों में किसी वीर और उदारता वाले योद्धा की बात होगी तो उसमें सबसे पहला नाम राणा सांगा का ही होगा। लेकिन कहते हैं न कि एक वीर को हराने का कार्य सिर्फ विश्वासघाती ही कर सकता है। इन सभी के बावजूद राणा सांगा लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत...

क्या आप जानते है ! इस लड़के ने तीन दिनों तक पूरी दिल्ली को किया था कैद

आज हम भारत के उस वीर योद्धा के बारे में बता रहे हैं, जिसने बहुत कम समय में अधिक युद्धों को जीत कर लोगों के बीच वीरता और पराक्रम की एक मिसाल कायम की थी। छत्रपति शिवाजी के बारे में तो आप भलीभांति जानते होंगे, लेकिन ये जानते हैं कि जिस सपने की छत्रपति शिवाजी ने नींव रखी थी, उस सपने को पूरा किसने किया था। जी हां उस सपने को बाजीराव बल्लाल भट्ट यानी पेशवा बाजीराव प्रथम ने पूरा किया था। हिंदुस्तान के इतिहास का बाजीराव अकेला ऐसा योद्धा था, जिसने 41 लड़ाइयां लड़ीं और 1 भी बार हार का सामना नहीं किया। भारत के इतिहास में बाजीराव एक ऐसा योद्धा था, जिसने अपने शासन के दौरान आधे से ज्यादा भारत पर राज चलाया था। बाजीराव ने मुगलों को दिल्ली और उसके आसपास तक समेट दिया था। बाजीराव बल्लाल भट्ट ने ही पुणे को कस्बे से महानगर में बदला था। बाजीराव ने ही निजाम, बंगश से लेकर मुगलों और पुर्तगालियों को कई बार धूल चटाई।...

तात्या टोपे से अंग्रेजों को था इतना खौफ की दो बार दी थी फांसी

देश की आजादी के लिए कई योद्धाओं ने अपना बलिदान दिया हैं। इनमें से ही एक थे तात्या टोपे। तात्या टोपे ही थे जिन्होंने 1857 की स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई की नींव रखी और देशभर के लोगों को आजादी का मतलब समझाया। साथ ही उन्होंने ही देशवासियों के अंदर आजादी का बीज बोया था। देश की पहली स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक थी। तत्या टोपे ही थे जिन्होंने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब पेशवा, राव साहब, बहादुरशाह जफर आदि के विदा हो जाने के बाद करीब एक साल बाद तक विरोधियों के नाक में दम कर रखा था। आज उनके बलिदान दिवस के मौके पर जानते है कुछ रोंचक बातें। तात्या टोपे का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के पास वाले गांव येवला में हुआ था। उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पाण्डुरंग राव भट्ट़ था। उनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के यहां काम करते थें। उनके ...

युद्ध में न हारने वाले इस शासक से डरते थे मुगल आक्रमणकारी

भारत की इस धरती पर एक से बढ़कर एक वीर योद्धा ने जन्म लिया है। इन योद्धाओं के कारण भारत का नाम पूरे विश्व में बहुत ही इज्जत के साथ लिया जाता है। आज हम आपको भारत की वीर भूमि राजस्थान में जन्मे राणा सांगा के बारे में बता रहे हैं, जिनका नाम महाराणा संग्रामसिंह था। राणा सांगा ने राजस्थान के मेवाड़ पर 1509 से 1527तक शासन किया। राणा सांगा का जन्म सिसोदिया सूर्यवंशी राजपूतों के घर में 12 अप्रैल,1482 को मालवा में हुआ था। उनके पिता का नाम राणा रायमल था। राणा सांगा वो शासक थे, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ राजपूतों को एकजुट किया और उनका मुकाबला किया था। अगर सही मायनों में किसी वीर और उदारता वाले योद्धा की बात होगी तो उसमें सबसे पहला नाम राणा सांगा का ही होगा। लेकिन कहते हैं न कि एक वीर को हराने का कार्य सिर्फ विश्वासघाती ही कर सकता है। इन सभी के बावजूद राणा सांगा लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत...

क्या आप जानते है एक बुढ़िया की सीख ने चंद्रगुप्त मौर्य को बनाया महान शासक

भारत की धरती पर दुनिया में सबसे ज्यादा वीरों ने जन्म लिया है। अगर भारत को वीरों की जन्मभूमि कहा जाएगा तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा। आज हम आपको एक ऐसे ही महान शासक के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपनी वीरता और पराक्रम से इतिहास में अपना नाम दर्ज किया है। बचपन वैसे तो चंद्रगुप्त की बचपन और युवास्था के बारे में बहुत कम जानकारी है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, उनका संबंध नंदा (बिहार) राजवंश से था। एक संस्कृत नाटक मुद्राराक्षस में उन्हें ‘नंदनवय’ यानी की नंद के वंशज भी कहा गया था। चंद्रगुप्त किस जाति के थे, इसके बारे में भी ठीक से जानकारी उपलब्ध नहीं है। मुद्राराक्षस के अनुसार, चंद्रगुप्त को वृषाला भी कहा गया है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, चंद्रगुप्त के पिता नंद के राजा थे, जिनका नाम महानंदा और उनकी मां का नाम मोरा था। मां के नाम की वजह से उनका उपनाम मौर्य पड़ा। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, चंद्...

सूर्य ही नहीं, इस असुर का भी अंश था कर्ण

कर्ण महाभारत के सबसे चर्चित पात्रों में से एक था। उसकी दानवीरता की कहानी आज भी लोगों के बीच प्रचलित है। कर्ण कुंती का पुत्र और पाण्डवों का भाई था, लेकिन उसका पालन राधा नाम की महिला ने किया था। जिसकी वजह से कर्ण को राधेय नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर लोग यही जानते हैं कि कर्ण, कुन्ती और सूर्यदेव का पुत्र था। लेकिन, आपको ये जानकर हैरानी होगी कर्ण के अन्दर एक असुर का भी अंश था। दरअसल, कर्ण, दम्बोद्भव नाम के असुर का अंश था। दम्बोद्भव, सूर्य देव का बहुत बड़ा भक्त था। उसने कड़ी तपस्या करके सूर्यदेव को प्रसन्न कर लिया और उनसे वरदान में एक हजार दिव्य कवच मांगे। इन कवचों की विशेषता थी कि जो भी व्यक्ति उस कवच को तोड़ता, उसकी तत्काल मृत्यु हो जाती थी। इस वरदान के कारण असुर दम्बोद्भव का अत्याचार काफी बढ़ गया और वो मनमानी करने लगा। फलस्वरूप, भगवान विष्णु ने उसका विनाश करने के लिए अपने अंश नर और नारा...

जानें कोका कोला से Santa Claus का क्या है रिश्ता

जिस Santa Claus को आज हम सभी जानते हैं और प्यार करते हैं क्या आपको पता वे ऐसा बिल्कुल भी नहीं दिखते थे। सफेद दाढ़ी, लाल सूट और मुस्कुराता हुआ चेहरा। जी हां आज के सांता क्लॉस की तस्वीरें कुछ ऐसी ही हैं। लेकिन वास्तव में वे ऐसे बिल्कुल भी नहीं थे। आपको जानकर हैरानी होगी साल 1931 से पहले सांता को एक लंबे डरावने साधू के रूप में दिखने वाले आदमी के रूप में दर्शाया जाता था। उस वक्त के सांता लाल रंग के कपड़े नहीं बल्कि मटमैले कपड़े पहने नजर आया करते थे। आइए आज हम आपको बताते हैं मटमैले कपड़े पहने नजर आने वाले सांता क्लॉस ने कब लाल सूट पहन लिया… दरअसल कोका-कोला कंपनी ने दिसंबर 1931 में सांता की इस नई तस्वीर सामने लाई है। जिसे चित्रकार Haddon Sundblom द्वारा बनाई गई थी। यह तस्वीर साल 1931 में कोका-कोला ने अपने विज्ञापन के लिए बनवाई थी। जिसके बाद साल 1931 से 1964 तक Haddon Sundblom ने  हर साल कोका-कोल...

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