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अपने गानों और गज़लों से लोगो के दिलो पर राज करने वाले पंकज उधास को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाए

अपने गानों और गज़लों से लोगो के दिलो पर राज करने वाले पंकज उधास को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाए

चिट्ठी आई आई है…आई है यह फेमस सॉग किसे याद नहीं है। भारतीय संगीत के क्षेत्र में जाना माना नाम है पंकज उधास । वो दौर ऐसा रहा जिसके गाने आज भी गुनगुनाए जाते है 80 और 90 दशक की आयी फिल्मों के गीत आज भी मंत्रमुग्ध कर देते है। पंकज उधास के गजलों की बात करें तो दिल को छू लेने वाला होता है। बता दें अपने गानों और गज़लों से लोगो के दिलो पर राज करने वाले पंकज उधास का आज जन्मदिन है।

भारत के प्रसिद्ध गायक पंकज उधास का जन्म गुजरात में राजकोट के पास जैतपुर के एक बीयर बनाने वाले परिवार में हुआ था। पंकज अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनकी मां का नाम जीतूबेन और पिता का नाम केशुभाई उदास है। पंकज ने बीपीटीआई भावनगर से शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद उनका परिवार मुम्बई आ गया। पंकज उधास के बड़े भाई मनहर उधास रंगमंच के अभिनेता थे। एक वजह यह भी थी कि पंकज संगीत के सम्पर्क में आये और साथ ही रंगमंच पर उनका पहला गाया गीत ऐ मेरे वतन के लोगों था। बता दें बॉलीवुड में पंकज के बड़े भाई मनहर उधास ने हिंदी पार्श्व गायक के रूप में भी सफलता प्राप्त की थी। उनके दुसरे भाई निर्मल उदास भी एक प्रसिद्ध गज़ल गायक हुये।

गायिकी के क्षेंत्र में शुरूआत को लेकर पंकज उधास अपने भाइयों में सबसे पहले रहे। साल 1972 में आयी फिल्म कामना में पकंज ने अपनी आवाज दी लेकिन ये असफल हुई। कुछ समय बाद पंकज अपनी ग़ज़ल गायन की रूचि और भी विकसित किया और अपना करियर बनाने के लिए उर्दू भी सीखी। उनका पहला ग़ज़ल एल्बम आहत 1980 में रिलीज हुआ और वहीं से उन्हें सफलता मिलनी शुरू हो गयी। आपको बता दें पंकज उधास ने करीब 40 एल्बम 2009 तक रिलीज कर चुके है। इनमें कई ऐसे हिट एल्बम है हसरत, महक, घूघंट, नशा-2, अफसाना, आफरीन, नशीला, हमसफर, खूशबू और टूगेदर जिसके गाने अभी भी लोगों की जुंबा पर है। बॉलीवुड में पंकज के संगीत की बात करें तो उन गानो और गजलो को कैसे भूल सकते है जो बचपन से हमारे होठो पर रहा। इनमें साजन फिल्म का वो गाना जिये तो जिये कैसे बिन आपके, या मोहरा फिल्म का न कजरे की धार, दिल रोता है रो रो दुहाई किसी कोई प्यार न करें।

फिल्मी दुनिया के पंकज उधास विभिन्न पुरस्कारों के साथ पद्यम श्री पुरस्कार से सम्मानित भी है बता दें उनकी गायकी का जादू आज भी बरकरार है वैसे अभी के फिल्मोें मे ग़ज़लो का फैशन तो कम हो गया है फिर भी पंकज मानते है कि संगीत तो अमर होता है। एक बार जो गीत गा दिया जाए और जो सुनने वाले के दिल में उतर जाये तो ऐसे गीत कभी भी नहीं मरते है। इस समय के संगीत तो उस दौर से बिल्कुल अलग है पर जब ये सुनाई पड़ते है तो सभी अपने गम भुल जाते है।

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