Loading...
आस्था

अपने भाग्य को वश में करने के लिए करें ये 3 काम

अपने भाग्य को वश में करने के लिए करें ये 3 काम

ज्ञानियों के अनुसार कर्म ही भाग्य है, एक कर्मवान मनुष्य हमेशा ही अपने भाग्य का निर्माता होगा ना कि उसका दास। ऐसा इसलिए क्योंकि भाग्य पर किसी वश नहीं चलता, बावजूद इसके यह हमेशा कर्म के अनुरूप ही निर्मित होता है। अत: जो मनुष्य हमेशा अपना कर्त्तव्य करता है, भाग्य हमेशा ही उसका साथ देता है। इसलिए अगर चाहते हैं कि जीवन में किस्मत का साथ आपको हमेशा मिले तो आगे बताए गए ये 3 काम करने से हमेशा बचें।

1. बार-बार एक ही भूल करना: बार-बार एक ही भूल ना करें क्योंकि यह मूर्खता होती है और लगातार इसे दुहराना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भावी पीढ़ी इसे ही पदचिह्न मानकर आगे बढ़ती है। अत: एक ही गलती बार-बार दुहराना आपको पापी मनुष्यों की श्रेणी में ले आता है जिसे कभी भी भाग्य का साथ नहीं मिल सकता।

2. परिश्रम रहित मार्ग का चुनाव: सफलता के लिए परिश्रम से रहित या कम परिश्रम के साथ होने वाला आसान मार्ग का चुनाव करना हमेशा ही आपको भाग्य का दास बनाएगा।

चाहे वह धन कमाना हो, अध्ययन करना हो या कोई अन्य कार्य, किसी भी काम को सफलतापूर्वक पूर्णता देने के लिए मानसिक तथा शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है। इन कार्यों को पूरा होने के लिए जहां समय देने की आवश्यकता होती है, वहीं अनुकूल परिणामों की प्राप्ति के लिए धैर्य के साथ इंतजार की आवश्यकता होती है।

ऐसे में अगर आप इनके सरल विकल्प अपना लेते हैं तो तुरंत परिणाम तो मिलेंगे लेकिन वह दूरगामी फलीफूत नहीं होगा या कहें बस थोड़े ही समय के लिए यह परिणाम दिखेगा। उदाहरणार्थ, कई लोग जल्दी धन कमाने के लिए झूठ, छल, आदि का सहारा लेते हैं, कई लोग जुआ-सट्टा आदि का मार्ग भी अपनाते हैं जिससे उन्हें तुरंत धन लाभ प्राप्त होता दिखता है। किंतु धीरे-धीरे यह धन कमाने का लालच बढ़ता जाता है और व्यक्ति अपनी मनुष्यता खोने लगता है। इस प्रकार वह अपने अनुचित कार्यों को करते हुए कई और प्रकार के अनुचित कार्य करने के लिए भी प्रेरित होता है जो उसे पतन के गर्त में ले जाते हैं।

आखिरकार आगे जाकर वह ना केवल अपना धन खोता है, बल्कि प्रतिष्ठा-सम्मान खोकर दुर्भाग्य का शिकार भी हो जाता है। इसलिए जो परिश्रम से नहीं मिला उसका फल भी आपके लिए हमेशा क्षणभंगुर ही रहेगा और आप हमेशा बुरे परिणामों के लिए भाग्य को कोसते रहेंगे।

3. अधिक बोलना

ज्ञानियों का कथन है कि ‘अधिक बोलना नाश को निमंत्रण देना है’। शास्त्रों के अनुसार बोलने से अधिक सुनना और समझना आवश्यक है। बोलने की अति में आप अक्सर प्रसंग को पूरी तरह सुन और समझ नहीं पाते, ऐसे में अतिरेक बोलने की आदतवश कई बार आप ऐसे शब्द बोल जाते हैं जो हर रूप से आपके लिए हानिप्रद हो सकता है।

ऐसे में संभव है आप अपने या दूसरों के रहस्य भी उजागर कर दें जो आपको किसी का विश्वासपात्र भी नहीं बनने देगा। यह आपकी तरक्की के मार्ग में रुकावट भी बन सकता है और आप अपने हर काम के लिए भाग्य का साथ ना होने का दुख मनाएंगे। इसलिए अत्यधिक बोलने से हमेशा बचें।

Lost Password

Register