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इन गंदे कामो में महिलाओं ने पुरुषों को भी छोड़ा पीछे

इन गंदे कामो में महिलाओं ने पुरुषों को भी छोड़ा पीछे

आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘दंगल’ में कहा था ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के’, ये बात आमिर ने बिल्कुल ठीक कही थी। हमारे देश में आज महिलाएं पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। वो पुरुषों से किसी भी मामले में रत्ती भर भी कम नहीं है। आज हर क्षेत्र में महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं और देश का नाम रोशन कर रही हैं, चाहे वो खेल का मैदान हो, बिजनेस हो या फिर नेतागिरी।

आज हमारे देश की महिलाएं कई बड़ी-बड़ी कंपनियों में ऊंचे-उंचे पदों पर बैठी हुई हैं। वो ऐसे ही ऊंचे पदों पर नहीं चली गईं, इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष छिपा हुआ है। एक रिपोर्ट की मानें तो जिम्मेदारी और शीर्ष पदों पर अधिक महिलाओं के होने से देश-दुनिया में रिश्वतखोरी कम हो सकती है।

‘रिश्वत’ एक खतरनाक बीमारी

दरअसल रिश्वतखोरी एक ऐसी बीमारी है, जो बड़े से बड़े ईमानदारों का ईमान भी हिलाकर रख देती है। चंद पैसों की लालच में लोग अपना ईमान बेच देते हैं और इसका गहरा प्रभाव देखने को मिलता है सरकारी नौकरियों में। सरकारी नौकरियों में रिश्वतखोरी कुछ इस कदर घुल-मिल गई है कि इसके बिना कोई काम ही नहीं होता। आधार कार्ड से लेकर जाति-आय प्रमाण पत्र बनवाने और यहां तक की सरकारी नौकरी पाने तक के लिए भी सरकारी कर्मचारियों और लोगों को रिश्वत खिलानी पड़ती है, तब जाकर कहीं काम हो पाता है।

रिश्वत देने में महिलाएं पुरुषों से भी आगे

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (टीआईआई) ने हाल ही में रिश्वतखोरी को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि करीब 54 फीसदी भारतीय महिलाओं ने माना है कि उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए रिश्वत दी है। मतलब साफ है कि रिश्वत के बिना नौकरी नहीं मिलेगी। अब इस रिपोर्ट में एक बात और सामने आ रही है कि सरकारी नौकरी या किसी भी नौकरी के लिए महिलाओं के साथ बड़े पदों पर आसीन अधिकारी शारीरिक या मानसिक रूप से उत्पीड़न भी करते हैं और इस बात को 33 महिलाओं ने माना है। ये रिपोर्ट ग्रामीण इलाकों की 1,100 महिलाएं और शहरी इलाकों की 3,500 महिलाओं पर किए गए सर्वे के आधार पर जारी की गई है।

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि करीब 35 फीसदी महिलाओं का कहना है कि उन्हें नौकरी देने के काम पर अधिकारियों ने उनसे प्रत्यक्ष तौर पर रिश्वत देने की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक 54 फीसदी महिलाओं ने माना है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए उन्होंने रिश्वत दी है, जबकि 43 फीसदी महिलाओं का कहना है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए उन्होंने किसी तरह की कोई रिश्वत नहीं दी।

हालांकि रिश्वत देने के मामले में ग्रामीण महिलाएं सबसे आगे हैं, क्योंकि उन्हें अपने अधिकारों के बारे में ज्यादातर पता होता नहीं है और यहीं कारण है कि वो अपना निकलवाने के लिए रिश्वत तक देने को तैयार हो जाती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष और महिलाओं के भ्रष्टाचार और लिंग (जेंडर) के बीच सीधा संबंध है और यहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी देता है। हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं कम भ्रष्टाचारी होती हैं और इस बात को महिलाएं और पुरुष दोनों ही मानते हैं। करीब 38 फीसदी लोगों का कहना है कि अगर जिम्मेदार और शीर्ष पदों पर महिलाएं अधिक हों तो रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार की संभावना बेहद ही कम हो जाएगी।

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