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आस्था

इस दरगाह पर माथा टेकने के बाद नहीं रहता कोई बेऔलाद

इस दरगाह पर माथा टेकने के बाद नहीं रहता कोई बेऔलाद

भारत को प्राचीनकाल से ही अनेक धार्मिक और रहस्यमय तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां पर हर धर्म के लिए अलग-अलग तीर्थ स्थल हैं, जिनका इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। लोगों में पूजा-पाठ करने की परंपरा यहां शुरू से चली आ रही है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए तो कोई अपने भाग्य को बदलने के लिए अल्लाह के दरबार में जाते हैं। हजारों सालों से लोग भारत में मौजूद तीर्थ स्थानों की यात्रा करते आ रहे हैं। श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर हजारों मील की यात्रा तय करके खुदा के दरबार में जाते हैं। आज हम आपको ऐसी दरगाह के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां सालभर भीड़ उमड़ी रहती है।

ख्वाजा शरीफ दरगाह

ख्वाजा शरीफ की दरगाह राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित है। इस दरगाह को भारत का प्रसिद्ध धार्मिक स्थान माना जाता है। इसके अंदर ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की कब्र बनी हुई है। ये गरीब नवाज के नाम से भी प्रसिद्ध है। ख्वाजा शरीफ आने वाले लोगों का मानना है कि यह एक ऐसा पाक-शफ़्फ़ाक नाम है जिसको सुनने से भी सकून की प्राप्ति होती है। ख्वाजा शरीफ की दरगाह पर आम इंसान के साथ-साथ फिल्मी सितारे भी अपनी रिलीज हुई फिल्म की सफलता के लिए दुआ मांगने के लिए आते हैं। इसके साथ ही राजनीति से जुड़े लोग अपनी सत्ता की सलामती के लिए यहां दुआएं मांगते हैं। भारत के हर हिस्सों से यहां लोग आकर अपनी ख्वाइशों की पूर्ति के लिए सिर नवाते हैं। गरीब नवाज के नाम से जाने जानी वाली इस दरगाह से अनेक मान्यताएं जुड़ी हैं।

 

मान्यता

इस कथा में बताया गया है कि ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का जन्म सन् 1141 में खुरासान प्रांत में हुआ था। 11 साल की उम्र में मुईनुद्दीन के पिता की मृत्यु हो गई थी। पिता की मृत्यु के बाद उनके पास अपने जीवन यापन के लिए केवल एक जमीन का टुकड़ा था। एक दिन जब मुईनुद्दीन अपने घर पर थे उस समय वहां हज़रत इब्राहिम कंदोजी का आना हुआ। मुईनुद्दीन ने उनकी खूब खातिरदारी की जिससे हज़रत इब्राहिम कंदोजी बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने प्रेम से मुईनुद्दीन सिर पर हाथ फेरा।

इसके बाद से ही मुईनुद्दीन चिश्ती ने अपना घर त्याग दिया और समाधि के लिए एक वृक्ष से नीचे बैठ गए। लेकिन उस वृक्ष के नीचे से कुछ सैनिकों ने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती को ये कहकर उठा दिया कि “यहां राजा के ऊंट बैठते हैं” यह सुनने के बाद मुईनुद्दीन चिश्ती बिना कुछ कहे वहां से चले गए। जिसके बाद उस स्थान पर ऊंट बैठे तो खड़े नहीं हो सके। इसके बाद सैनिकों अपनी गलती मानकर मुईनुद्दीन चिश्ती से क्षमा मांगी। वहां के राजा ने एक तालाब के किनारे पर ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के लिए निवास स्थान का निर्माण करा दिया। अपने निवास स्थान पर बैठकर मुईनुद्दीन चिश्ती हर समय लोगों के लिए खुशियां और अपने लिए दुख-दर्द के साथ मेहनत करने की दुआएं मांगते थे।

करिश्मा

इस दरगाह में एक चमत्कारी पेड़ स्थित है। जिसके बारे में कहा जाता है कि जो महिला इस पेड़ के फल का सेवन करती है वो कभी बेऔलाद नहीं रहती। मान्यता है कि एक बार एक किन्नर ने इस पेड़ के फल का सेवन किया था और चमत्कार हो गया, हुआ ऐसा कि वह किन्नर गर्भवती हो गई उसने एक पुत्र को जन्म द‌िया था। जो व्यक्ति ख्वाजा मोइनुद्दीन च‌िस्ती की दरगाह आकर स‌िर झुकाते हैं उनकी सभी मुरादें पूरी होती हैं।

विशेषता

लोगों की मान्यता है कि ख्वाजा शरीफ की दरगाह जाकर लोगों को सुकून की प्राप्ति होती है। उनकी मुरादें पूरी होती हैं और उनको सभी दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं। यहां आकर दुआ मांगने पर ही मुगल काल में बादशाह अकबर को संतान की प्राप्ति हुई थी। जिसके बाद अकबर ने आगरा से लेकर अजमेर तक पैदल यात्रा करने के बाद दरगाह पर चादर चढ़ाई थी।

देग 

ख्वाजा शरीफ दरगाह की दो विशाल देग आज भी प्रसिद्ध हैं। इस देग को अकबर को जहांगीर ने भेंट किया था। इन विशाल देगों में खाना बनाकर हर साल ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की मजार पर उर्स के समय गरीबों में बांटा जाता था।

Main Darbar Ajmer Sharif Dargah

कैसे पहुंचें

रेलवे मार्ग- अजमेर रेलवे स्टेशन से आपको, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ जैसे बड़े शहरों के लिए आसानी से ट्रेन मिल जाती है।

सड़क मार्ग- अजमेर सड़क मार्ग दिल्ली, अहमदाबाद, जयपुर जैसे बड़े शहरों को जोड़ता है। अजमेर से दिल्ली 402 कि.मी, जयपुर 334 कि.मी, अहमदाबाद 546 कि.मी, की दूरी पर स्थित है।

वायु मार्ग अजमेर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई किशनगढ़ हवाई अड्डा है। जो अजमेर लगभग 33 कि,मी की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचकर बस के द्वारा अजमेर आसानी से पहुंच सकते हैं।

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