Loading...
आस्था

क्या आप जानते है पूजा में क्यों की जाती है कलश की स्थापना

क्या आप जानते है पूजा में क्यों की जाती है कलश की स्थापना

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा करने की परंपरा शुरू से चली आ रही है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए तो कोई अपने भाग्य को बदलने के लिए पूजा करता है। हिंदू धर्म में अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए अलग पूजा की सामग्री और विधि का प्रयोग किया जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा करते समय कलश की स्थापना क्यों की जाती है।

हिंदू धर्म में पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है, पूजा करते समय कई प्रकार की पूजन सामग्री का प्रयोग किया जाता है। जिसमें फूल, शुद्ध जल, पानी, दीपक, घंटी, शंख, आशन, कलश आदि प्रमुख हैं। भारतीय संस्कृति में कलश को बहुत शुभ माना जाता है। किसी भी त्योहार,विशेष पूजा में कलश की स्थापना और पूजन किया जाता है इसके बिना कोई शुभ कार्य की शुरुआत नहीं की जाती।

कलश की तुलना समस्त ब्रह्राण्ड से की गई है, क्योंकि कलश का आकार ब्रह्राण्ड के आकार के समान होता है। जिसमें पूरा संसार जैसे देवी- देवता,नदी,पर्वत,तीर्थ समावेश है। कलश की स्थापना करना बहुत शुभ माना जाता है। कलश को ईशान कोण में ही स्थापित करना शुभ होता है, कलश की स्थापना के लिए आप तांबे और मिट्टी दोनों प्रकार के कलश का प्रयोग कर सकते हैं।

शास्त्रों में भी कलश के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है,इसमें कलश की लंबाई, चौड़ाई आदि के बारे में बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार कलश की चौड़ाई मध्य से पचास अंगुल होनी चाहिए, ऊंचाई सोलह अंगुल, नीचे से बारह अंगुल चौड़ा, और उसका मुंह आठ अंगुल का होना चाहिए। कलश की स्थापना करते समय उसमें शुद्ध जल को भरा जाता है। लेकिन कई बार अनुष्ठानों आदि में इसकी स्थापना करने के लिए इसमें विशेष प्रकार की वस्तुओं को भी रखा जाता है। किसी धर्म के लाभ के लिए अनुष्ठान करते समय इसमें शुद्ध जल के स्थान पर भस्म को भरा जाता है। वहीं धन संबंधी लाभ के लिए इसमें मोती और कमल का इस्तेमाल किया जाता है, पूजा के कलश को जमीन पर रखने से पहले जमीन को शुद्ध करके उसपर घंटार्गल यन्त्र बनाने के बाद ही उसको जमीन पर रखना शुभ माना जाता है।

Lost Password

Register