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अजब-गजब

खेती कर सालाना 1 करोड़ रुपये कमा रहा है ये किसान

खेती कर सालाना 1 करोड़ रुपये कमा रहा है ये किसान

इंसान अगर कुछ करने की ठान ले तो दुनिया में कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती है। अगर बात खेती की हो तो दुनिया में सभी जानते हैं कि बिना खेती के इंसान का जीवन संभव ही नहीं है। किसान खेत में जो फसल उगाता है उसे सभी लोग खाते हैं, यहां तक की जानवरों का चारा भी खेतों से ही आता है। अब जाहिर सी बात है खेत बहुत जरूरी हैं तो खेती पर भी खास ध्यान देना चाहिए। मालूम हो तो भारत में बहुत से ऐसे राज्य हैं, जहां कई बार खेती को मौसम के कारण बहुत नुकसान होता है। इन्हीं के बीच कुछ किसान ऐसे भी हैं जो नई तकनीक का इस्तेमाल करके खेती से ही ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा लेते हैं।

आज हम आपको राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक गांव गुड़ा कुमावतान के बारे में बता रहे हैं। इस गांव का एक किसान खेमाराम नई तकनीक से खेती करके अपने गांवों को सबसे अलग ले जा रहा है। 45 वर्षीय खेमाराम नई तकनीक और अपने ज्ञान की वजह से लाखों किसानों के लिए उदाहरण बन गया है। आज खेमाराम लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहा है। इस तरह की खेती की प्रेरणा खेमाराम को इजरायल से मिली, जिसके जरिए 4 साल पहले संरक्षित खेती पॉली हाउस करने की शुरुआत की थी। आज इसको देखते हुए वहां लगभग 200 पॉली हाउस बन गए हैं। खेमाराम खेती करके हर साल 1 करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रहे हैं।

खेमाराम को सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मौका मिला था। इजरायल से वापस आने के बाद वहां की खेती की तकनीक को अपनी खेती में लागू किया। 4 हजार वर्गमीटर में पहला पॉली हाउस सरकार द्वारा मिली सब्सिडी से लगाया। एक पॉली हाउस लगाने में 33 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें 9 लाख खेमाराम ने बैंक से लोन लेकर दिए, बाकी सरकार से सब्सिडी मिल गई थी। खेमाराम ने पहली बार खीरा बोकर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च किए और 4 माह बाद 12 लाख रुपये का खीरा बेचकर मुनाफा कमाया। देखते ही देखते कुछ ही महीनों में बैंक का कर्जा भी निपट गया।

खेमाराम को देखकर उस क्षेत्र में लगभग 200 पॉली हाउस बन गए हैं। किसान संरक्षित खेती करके अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इस जगह को लोग अब मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं। खेमाराम ने आधी हेक्टेयर जमीन में 2 तालाब बनाए हैं, जिसमें बरसात का पानी एकत्रित हो जाता है। इस पानी से 6 महीने तक सिंचाई की जा सकती है। ड्रिप इरीगेशन और तालाब के पानी से ही पूरी सिंचाई होती है। हर समय बिजली नहीं रहती है, इसलिए खेमाराम ने अपने खेत में सरकार की सब्सिडी की मदद से 15 वाट का सोलर पैनल लगवाया और अपने पैसों से 25 वाट का सोलर पैनल लगवाया। इनके पास कुल 40 वाट का सोलर पैनल लगा हुआ है। लंबे समय से किसान जो पुरानी पारंपरिक खेती करते आए हैं, उसमे बदलाव करके संरक्षित खेती करके अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

 

 

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