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जानिए किसी को कम तो किसी को ज्यादा क्यों काटते हैं मच्छर?

जानिए किसी को कम तो किसी को ज्यादा क्यों काटते हैं मच्छर?

आपको जानकर हैरानी होगी कि दस में से किसी एक के प्रति ही मच्छर ज्यादा आकर्षित होते हैं। शायद आपको पता ना हो लेकिन किसी को मच्छर कम काटता है या ज्यादा, यह उसके अनुवांशिक फीचर या शारीरिक स्ट्रक्च पर भी निर्भर करता है। एक आम धारणा है कि खाने में कार्बन डाइऑक्साइड, कोक, बियर, मीठी चीजों का ज्यादा प्रयोग करने वाले लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं लेकिन वैज्ञानिक शोधों में इससे अलग भी एक कहानी है। आगे हम आपको इसके बारे में जो बता रहे हैं उसे जानकर शायद आप चौंक जाएं…

क्यों काटते हैं मच्छर?

बहुत कम लोगों को पता होगा कि सिर्फ मादा (फीमेल) मच्छर ही काटती हैं क्योंकि अपने अंडों को जिंदा रखने के लिए इन्हें स्तनधारी (मैमल) जीवों के खून की आवश्यकता होती है। मच्छरों की भी कई प्रजातियां होती हैं और खून को पसंद करने में हर प्रजाति की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं।

अकेले अमेरिका में मच्छरों की 150 प्रजातियां हैं और मैमल खून की पसंद में सबकी प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं यह वैज्ञानिक शोधों में साबित हो चुका है।

कारण

मच्छर अपने अंडों को जिंदा रखने के लिए सबसे अच्छी गुणवत्ता का खून ढूंढते हैं। इसके लिए उनके चुनाव का तरीका भी दिलचस्प है। अगर इंसानों की बात करें, तो हर महिला या पुरुष की शारीरिक बनावट जहां एक सी होती है, शरीर के अंदर चल रही रासायनिक क्रियाएं सबमें अलग होती हैं। इन क्रियाओं के परिणामस्वरूप माइक्रोब्स बनते हैं और कुछ रसायनों का सीक्रीशन होता है, इसी आधार पर देह गंध बनती है। मच्छर इस गंध को 30 मीटर की दूरी से भी सूंघ सकते हैं और इसी गंध के आधार पर अपने लिए वे अपने लिए खून का चुनाव करते हैं।

कैसे बनते हैं ये केमिकल?

स्वाभाविक है कि आप सोचेंगे मच्छरों को आकर्षित करने वाले ये केमिकल आखिर शरीर में बनते कैसे हैं… मच्छर यूनिक माइक्रोब्स सीक्रीशन को पहचानते हैं। ज्यादातर शरीरों में माइक्रोब्स साधारण रूप से बनते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके शरीर में इसका निर्माण अधिक होता है, इसका कारण अनुवांशिक या खानपान की आदतें भी हो सकती हैं। मान लीजिए आपके शरीर में 100 ट्रिलियन माइक्रोब्स बने, तो समान्य सीक्रीशन से यह 10 गुना अधिक होता है जो पसीने की दुर्गंध आदि के रूप में सामने आती है। ये माइक्रोब्स शरीर के इम्यून सिस्टम का भी जरूरी हिस्सा होते हैं। आप भले ही रोजाना नहाकर इसे साफ कर लें, आपको इसकी गंध ना आए लेकिन मच्छरों में इसे सूंघने की क्षमता इतनी अधिक होती है कि दूर से भी वे इस गंध को पहचान लेते हैं और इसकी तरफ खिंचे चले आते हैं।

ब्लड ग्रुप

मच्छर अपनी पसंद के मैमल खून की खोज में होते हैं जिसे दूर से ही गंध से वो पहचान लेते हैं। कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि ‘ओ’ और ‘ए’ ब्ल्ड ग्रुप की तरफ मच्छर ज्यादा आकर्षित होते हैं। 85 प्रतिशत ममलों में ब्लड ग्रुप के अनुसार मच्छरों का आकर्षण देखा गया।

मच्छरों के अनुसार स्वाद का निर्धारण कैसे होता है?

हालांकि ज्यादा पसीना आना और कार्बन डाइऑक्साइड का सेवन मच्छरों को आकर्षित करने की वजह बन सकते हैं, लेकिन व्यक्ति विशेष के शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं के आधार पर भी यह तय होता है।

देखा गया है कि लैक्टिक एसिड मच्छरों को आकर्षित करने की वजह बनते हैं, बहुत अधिक चीज़, सोया, दही, अचार आदि का सेवन करते हुए इसके साथ भारी व्यायाम भी करते हैं तो आपकी त्वचा पर लैक्टिक एसिड की परत अधिक जमा होती है, इससे मच्छर आपकी तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जिन्हें मच्छरों के काटने का एहसास नहीं होता, उन्हें मच्छर बिल्कुल काटते ही नहीं हैं। हकीकत इससे थोड़ी अलग है।

यह वहां के वातावरण और उनके शरीर में मच्छरों के काटने से होने वाली एलर्जी पर निर्भर करता है कि उन्हें मच्छर का काटना पता चलता है या नहीं। कई लोगों में यह रासायनिक क्रिया ज्यादा दिखती है, इसलिए उन्हें यह महसूस होता है लेकिन कई लोगों में इसका रिएक्शन नहीं होता इसलिए उन्हें इसका पता नहीं चलता।

संक्षेप में कह सकते हैं कि जेनेटिक और शरीर में होने वाली रासायनिक या माइक्रोबायल क्रियाएं ही निर्धारित करती हैं कि मच्छर आपको काटेगा या नहीं। इसके साथ आपके ब्लड टाइप का भी एक खास कनेक्शन होता है। आप कार्बन डाइऑक्साइड, लहसुन, एल्कोहल आदि कितना अधिक लेते हैं, गहरे रंग के कपड़े पहनते हैं जैसी चीजें फिर सेकंडरी फैक्टर होती हैं।

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