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जानिए कैसे अदरक के प्रयोग से सिर्फ 1 घंटे में ठीक कर सकते हैं गठिया का दर्द

जानिए कैसे अदरक के प्रयोग से सिर्फ 1 घंटे में ठीक कर सकते हैं गठिया का दर्द

वो दिन बीत गए जब गठिया (अर्थराइटिस) को बुढ़ापे का रोग माना जाता था, आज कम उम्र के बच्चे भी इससे पीड़ित हैं। इसकी एक बड़ी वजह खानपान, लाइफस्टाइल में कमियां, धूप की कमी, अनुवांशिक आदि भी हो सकती है। पर यह एक ऐसा रोग है जो एक बार होने के बाद पूरी तरह ठीक होना जहां मुश्किल होता है, वहीं इसके कारण जोड़ों में होने वाला दर्द व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के काम करने में परेशानियां भी पैदा करता है। आगे हम आपको यहां कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जो आपको इसके दर्द से जहां तुरंत राहत देता है, वहीं रोग को कम करने में असरदार है।

अदरक: अदरक की प्रकृति उष्ण या कहें गर्म होती है इसके अलावा इसमें जिंजरोल नाम का एक तत्व होता है जो जोड़ों का दर्द सूजन दूर करने में अति लाभकारी माना गया है। इसलिए अर्थराइटिस का प्रभाव कम करने से लेकर इसका दर्द ठीक करने तक में अदरक को अत्यधिक कारगर माना गया है।

जोड़ों में स्थान पर अदरक का पेस्ट लगाने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है, अमूमन 1 घंटे में इसका असर दिखने लगता है। साधारण रूप से अदरक को पाने में उबालकर चाय की तरह या चाय में अदरक डालकर पीना, खाने में मसाले या किसी भी भी रूप में इसका प्रयोग लाभकारी होगा।

हालांकि पुराने गठिया का पूर्ण रूप से ठीक होना मुश्किल होता है लेकिन शुरुआती दौर में इसे ठीक किया जा सकता है। आधे इंच अदरक को छिलका निकालकर पेस्ट बना लें। 150 मिली उबले हुए पानी में इसे मिलाकर ठंडा होने दें। इस पानी का नियमित रूप से सेवन करें। इसका इस्तेमाल शुरुआती दौर का गठिया पूरी तरह ठीक कर सकता है।

दालचीनी: गर्म तासीर होने के कारण ठंड से होने वाली कई बीमारियों में यह लाभकारी है। गठिया भी वात रोगों में आता है जो ठंड से बढ़ता है। आयुर्वेद में दालचीनी को वात रोगों की एक असरदार औषधि मानी गई है।

डेढ़ चम्मच दालचीनी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर हर सुबह गर्म पानी के साथ लें। धीरे-धीरे गठिया का दर्द कम होने लगता है और रोग नियंत्रण में आ जाता है। यह इतना असरदार है कि अगर जिन रोगियों का चलना-फिरना बंद हो गया, वह भी धीरे-धीरे ठीक हो जाता है।

कैमोमाइल टी: आयुर्वेद के अनुसार गठिया के इलाज में यह कुछ सबसे प्रभावकारी औषधियों में एक माना जाता है। यह एंटी इंफ्लेमेंटरी होता है और जोड़ों में यूरिक एसिड बनने से रोकता है इसलिए अर्थराइटिस के दर्द में भी बहुत जल्दी राहत मिलता है। हालांकि इसका इस्तेमाल किसी डॉक्टर की सलाह से ही करनी चाहिए लेकिन साधारण रूप से रोजाना चाय के रूप में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

सेब का सिरका: एक ग्लास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर इस पानी को रोजाना सुबह पिएं। नियमित इस्तेमाल से यह गठिया ठीक करने में बेहद कारगर साबित होता है।

हल्दी: हल्दी में एंटी बैक्टीटियल तथा एंटी-इंफ्लेमेंटरी दोनों ही गुण होते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात बात यह है कि खाद्य रूप में आंतरिक प्रयोगों के अलावा लेप आदि के रूप में इसके बाह्य प्रयोग भी यह उतने ही असरदार साबित होते हैं। गठिया का सूजन कम करने में यह विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होता है।

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