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जानिए क्या हुआ जब कांबली ने छुए सचिन के पैर

जानिए क्या हुआ जब कांबली ने छुए सचिन के पैर

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और उनके बचपन के दोस्त विनोद कांबली के रिश्तों में दूरियां चल रही थी, लेकिन इन दोनों दोस्तों के रिश्ते फिरसे सुधर चुके हैं। आपको बता दें कि मुंबई में टी-20 लीग के समय कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद इन दोनों के बीच की दूरियां समाप्त हो गईं।

मुंबई टी-20  लीग का मुकाबला पूरा होने के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी चल रही थी। जिसमें विनोद कांबली को रनर-अप टीम का मेडल दिया जाना था। अवॉर्ड सेरेमनी की मंच पर सचिन तेंदुलकर पहले से मौजूद थे। मंच पर कांबली के आने के बाद सचिन ने कांबली को मेडल पहनाया और कांबली ने सचिन के पैर छू लिए जिसके बाद सचिन ने अपने बचपन के दोस्त को गले से लगा लिया।

आपको बता दें, कांबले टी-20 लीग लायंस टीम के मेंटर हैं। कांबले को मेडल पहनाने के लिए सचिन को सुनील गावस्कर ने सलाह ने कहा था। अब ये दोनों दोस्त फिरसे एक हो गए हैं, इनके बीच के गिले-शिकवे अब दूर हो चुके हैं। वहीं जिस समय कांबले सचिन के पैर छूने के लिए झुके थे उस समय की कुछ तस्वीरें और विडियो लगातार सोशल मीडिय़ा पर वायरल हो रही हैं।

आपको बता दें कि, मुंबई के आजाद मैदान पर हैरिस शील्ड ट्रॉफी का सेमीफाइनल मैच खेला जा रहा था। सचिन और कांबली श्रद्धाश्रम विद्यामंदिर स्कूल की तरफ से खेल रहे थे। उनके सामने थी सेंट जेवियर हाई स्कूल की टीम। जब दोनों बल्लेबाज बैटिंग उतरने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने मैदान पर ताबड़तोड़ गेंदबाजों की धुनाई की। गेंदबाज बॉल फेंकते-फेंकते परेशान हो चुके थे, लेकिन वो थे कि आउट होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। आखिरकार सचिन और कांबली ने वो विश्व रिकॉर्ड कायम कर ही लिया था। 664 रन, सिर्फ दो खिलाड़ी, वो भी स्कूली, बहुत बड़ा स्कोर होता है। सचिन ने इस मैच में 326 रन (नॉट आउट) और कांबली ने 349 रनों का स्कोर बनाया था। कांबली ने इस मैच में शानदार गेंदबाजी भी की थी और 37 रन देकर 6 विकेट झटके थे।

कांबली ने 1989 में अपना डेब्यू रणजी मैच खेला था और पहले ही मैच में पहली गेंद पर छक्का लगाकर एक नया रिकॉर्ड कायम कर लिया था।

टेस्ट मैचों में सबसे तेज 1,000 रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड भी कांबली के नाम है।

साल 1993 में अपने टेस्ट करियर का आगाज करते हुए कांबली ने शुरुआती 7 मैचों में ही दो दोहरे शतक और दो शतक ठोक दिये। ये एक विश्व रिकॉर्ड है।

उस दौर में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज शेन वार्न से बड़े से बड़े बल्लेबाज भी खौफ खाते थे, लेकिन कांबली ने शेन वॉर्न के एक ही ओवर में 22 रन ठोककर उनकी सारी हेकड़ी निकाल दी थी।

दो जिगरी’ यारों के बीच हुई थी अनबन

सचिन और कांबली स्कूल से ही ‘जिगरी’ दोस्त थे, लेकिन बाद में उनके बीच में अनबन हो गई। इसके लिए कांबली ने सचिन को ही जिम्मेदार माना। कांबली के अनुसार, जब वो अपने करियर और जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, उस समय सचिन ने उनकी कोई मदद नहीं की। इसके अलावा कांबली जब भी सचिन को फोन करते तो सचिन सिर्फ औपचारिकता निभाने वाले अंदाज में बात करते थे। यहां तक कि जब कांबली ने अपने बेटे के जन्मदिन पर सचिन को फोन किया तो उन्होंने बेहद ठंडे स्वर में बात की और कांबली के घर पर भी नहीं आए।

हालांकि, इसके लिए कहीं न कहीं कांबली ही जिम्मेदार थे। कांबली की आदतें और उनके इर्द-गिर्द ऐसे लोग थे, जिसकी वजह से सचिन ने उनसे दूरी बनाना ही बेहतर समझा।

दोनों को करीब से जानने वाले भी कहते हैं कि कांबली के पास सचिन से ज्यादा टैलेंट था। लेकिन, कांबली के पास अजीत तेंदुलकर जैसा बड़ा भाई नहीं था, जो उन्हें सही-गलत समझाता। यही कारण था कि कांबली का करियर असमय ही खत्म हो गया और सचिन क्रिकेट की दुनिया के ‘भगवान’ बन गए।

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