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आस्था / इतिहास

जानिए रमजान का इतिहास, इन चीजों से रहना होता है दूर

जानिए रमजान का इतिहास, इन चीजों से रहना होता है दूर

 रमजान इंडिया टाइम टेबल 2018

1. मुस्‍लिम समुदाय का पवित्र महीना रमजान शुरू हो गया है। बुधवार को चांद दिखाई दे गया है। गुरुवार पहला रोजा रखा जा रहा है। रमजान की तैयारियां घरों में चल रही हैं। बाजार में लोग रोजा इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी कर रहे हैं।

2. इस महीने में भगवान की दी हर नेमत के लिए अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है। महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है।

3. इस महीने दान पुण्य के कार्यों करने को प्रधानता दी जाती है। इसलिए इस महीने को नेकियों और इबादतों का महीना कहा जाता है।

4. इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना रमजान है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं। रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते-पीते। इसके साथ ही रमजान में बुरी आदतों से दूर रहने के लिए भी कहा गया है। रमजान में मुलमान लोग अल्लाह को उनकी नेमत के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। महीने भर रोजे के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। इन सबके बीच क्या आप जानते हैं कि रमजान क्यों मनाया जाता है? और इसका इतिहास क्या है? आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

5. ऐसा माना जाता है कि मोहम्मद साहब को साल 610 में लेयलत उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। उसी समय से रमजान को इस्लाम धर्म के पवित्र महीने के तौर पर मानाया जाने लगा। इस पवित्र में महीने में मुसलमान लोगों को कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

6. रमजान के दौरान रोजे रखने का मतलब केवल यह नहीं होता कि आप भूखे-प्यासे रहें। बल्कि, इस दौरान मन में बुरे विचार ना आने देने के लिए भी कहा गया है। रमजान में मुसलमान को किसी की बदनामी करने, लालच करने, झूठ बोलने और झूठी कसम खाने से बचना चाहिए।

7. इस साल रमजान महीने का पहला रोजा करीब 15 घंटा 11 मिनट और अंतिम रोजा 15 घंटा 35 मिनट का होगा। पहले रोजे की सहरी सुबह 3:33 बजे और इफ्तरा शाम 6:44 बजे किया जाएगा। आखिरी रोजे में सहरी सुबह 3:22 बजे और इफ्तार शाम 6:57 बजे होगा।

धर्म क्या है ?

धर्म क्या है ? अधिकतर लोग समझते हैं , धर्म हिन्दू , मुस्लिम , सिख , ईसाई, इत्यादि धर्म है . वास्तव में धर्म है – क्या करें , क्या न करें . यह धर्म की सही परिभाषा है, रिलीजियन नहीं . … सभी प्राणियों का अलग- अलग उम्र में अलग – अलग धर्म है. … जैसे – छात्र का धर्म पढाई करना है, बेटे का धर्म अपने माता – पिता की आज्ञा मानना और उनका सम्मान करना है . और मानव का धर्म मानव मात्र से प्रेम करना है . … कोई कार्य जो मानव मात्र की सहायता करता है धर्म है , और इसके विपरीत अधर्म है .

परहित सरिस धर्म नहीं भाई … इसका अर्थ – किसी की सहायता करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है . और किसी को पीड़ा पहुंचाने से बड़ा कोई अधर्म नहीं है … यह भगवान राम के रामायण में पवित्र शब्द हैं … निस्वार्थ सेवा से ही भगवान् या खुदा को जाना जा सकता है .

 

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