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आस्था

जानें कैसे जांचें रत्नों की शुद्धता

जानें कैसे जांचें रत्नों की शुद्धता
ज्योतिष विद्या के अंतर्गत रत्न विज्ञान को बड़ी प्रमुखता के साथ अपनाया गया है। वैदिक ज्योतिष में रत्नों का प्रचलन बढ़ गया है। रत्न खरीदना और पहनना आसान है परन्तु वो रत्न असली है या नकली ये बात पता लगाना बहुत कठिन है। रत्न की शुद्धता की जांच करना अपने आप में एक कठिन विषय है। रत्नों की पहचान भी एक कला है जिसमें अनुभव के साथ-साथ तकनीकी बारीकियों का ज्ञान आवश्यक  है।
 
कुंडली के अनुसार, उपयुक्त होने पर उस रत्न का कितना भार जातक को धारण करना चाहिए। रत्न के उपयुक्त होने पर रत्न की गुणवत्ता रत्न की फल देने की क्षमता को प्रभावित करता है। रत्नों की गुणवत्ता एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि कम अथवा बहुत कम गुणवत्ता का रत्न धारण करने पर रत्न इसके उपयुक्त होने के पश्चात भी कोई विशेष शुभ फल प्रदान नहीं करता। 
 
गुणवत्ता जांचने के मापदंड
 
• रत्नों की गुणवत्ता और शुद्ता को जांचने के लिए वैज्ञानिक विधियों जैसे रिफ्रेक्टिव इंडेक्स, स्पेसिफिक ग्रैविटी, हार्डनेस, क्लीवेज, लस्टर, प्लियोक्रोइज्म, स्पेक्ट्रम, चेल्सिया फिल्टर आदि की सहायता ली जाती है। रत्न विशेषज्ञ उपकरणों की मदद से रत्नों की गुणवत्ता की पहचान करते हैं। लैब में जांच के बाद इसके लिए प्रमाण पत्र भी जारी किए जाते हैं। 
• किसी भी रत्न को परखने के सबसे पहले मापदंड उस रत्न का रंग और चमक होते हैं। मोती तथा लाल मूंगे के मामले में इनकी मुख्य परख इनके रंग तथा चमक से की जाती है।
• इसके बाद रत्न को उसकी स्वच्छता तथा पारदर्शिता के लिए परखा जाता है। यह परख किसी रत्न की वास्तविक गुणवत्ता की जांच करने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। नवरत्नों में से मोती और लाल मूंगे को इस तरीके से नहीं परखा जाता क्योंकि ये दोनो रत्न अपारदर्शी होते हैं। बाकि के सात रत्नों को इस परीक्षण से परखा जा सकता है।
• यदि आप रत्न के आर-पार या उसके भीतर बहुत हद तक देख पाते हैं तो वह रत्न गुणवत्ता के हिसाब से बहुत अच्छा है तथा अपने प्रभाव देने में बहुत हद तक सक्षम होगा। यदि आप इस रत्न के आर-पार बिल्कुल भी नही देख पाते तथा इसके अंदर देख पाने की स्थिति में आपको इसके अंदर की अशुद्धता बादलों, लकीरों अथवा अनेक काले बिंदुओं के रूप में दिखाई देती है तो यह रत्न अपने प्रभाव देने में सही प्रकार से सक्षम नहीं है। 
• इनकी परख करने का एक और मापदंड इनकी ठोसता की परख होता है। अपनी ठोसता के गुण के चलते कोई भी रत्न एक जैसे वज़न लेने पर आकार में निम्न कोटि के रत्न की तुलना में लगभग आधा ही प्रतीत होगा।
 
रत्न की गुणवत्ता का विशेष महत्व :
 
रत्नों के भीतर कई प्रकार की अशुद्धियां पायीं जातीं हैं जो सामान्यतया बिंदुओं के रूप में, रेखाओं के रूप में अथवा बादलों के रूप में देखीं जातीं है जिसके कारण ऊर्जा तरंगे हमारे शरीर तक नहीं पहुंच पाती हैं। रत्न अपनी उपरी सतह से अपने ग्रह विशेष की ऊर्जा तरंगों को आकर्षित करते हैं तथा अपनी निचली सतह से इन ऊर्जा तरंगों को धारक के शरीर में स्थानांतरित कर देते हैं। रत्न की उपरी सतह से लेकर रत्न की निचली सतह तक जाने के लिए ऊर्जा की इन तरंगों को रत्न के भीतर से होकर जाना पड़ता है तथा यहां पर रत्न की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। 
 
रत्न में अशुद्धियों की मात्रा 
 
किसी रत्न में अशुद्धियों की मात्रा जितनी अधिक होती है उस रत्न की कार्यक्षमता तथा गुणवत्ता उतनी ही कम होती है। रत्नों के भीतर उपस्थित ये अशुद्धियां किसी ग्रह विशेष की ऊर्जा तरंगों को रत्न की उपरी सतह से लेकर रत्न की निचली सतह तक जाने से रोक देतीं हैं। रत्न की कार्यक्षमता शत प्रतिशत अथवा 100%  होने पर  रत्न में बिलकुल भी अशुद्धियों नहीं होती है।
 
40% गुणवत्ता वाला रत्न 
 
रत्न धारक को शुभ फल लेने के लिए कम से कम 40% गुणवत्ता वाला रत्न धारण करना चाहिए। रत्न अपनी उपरी सतह से अपने भीतर प्रवेश करने वालीं ऊर्जा की प्रत्येक 100 तरंगों में से कम से कम 40 ऊर्जा तरंगों को अपनी निचली सतह से रत्न धारक के शरीर में स्थानांतरित करने की क्षमता रखता हो। 
उत्तम गुणवत्ता वाले रत्न अपने ग्रह विशेष की कुछ ऐसी विशिष्ट ऊर्जा तरंगें भी आकर्षित करने में सक्षम होते हैं जो अन्य ऊर्जा तरंगों की तुलना में विशेष होने के कारण धारक को विशिष्ट लाभ प्रदान कर सकतीं हैं तथा इन विशिष्ट ऊर्जा तरंगों को आकर्षित कर पाना कम गुणवत्ता वाले रत्नों के लिए संभव नहीं होता। इस लिए रत्नों को खरीदते समय यह निश्चित कर लेना आवश्यक है कि आपके द्वारा खरीदा जाने वाला रत्न एक निश्चित कार्यक्षमता तथा गुणवत्ता से नीचे नहीं है
 
रत्नों की गुणवत्ता जांचने के तरीका
 
• हीरे के ऊपर गर्मी नहीं चढ़ती, उसे गर्म-गर्म दूध में डालने के बाद भी उसके ऊपर भांप नहीं जमेगी। अगर आपके हाथ में जो हीरा है वह असली है तो उसपर मुंह पर भांप छोड़ने के बाद भी उस पर ओस नहीं जमेगी।
• यदि आपको पीला पुखराज खरीदना है तो जौहरी द्वारा दिखाए गए अनेक पीले पुखराजों में से गहरा पीला और चमकदार लगने वाला पीला पुखराज हल्के पीले या कम चमक वाले पीले पुख़राजों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक अच्छा होने की संभावना होगी। पुखराज को एक दिन दूध में रखने के बाद भी वह पीला ही रहेगा, उसका कलर जैसा था वैसा ही रहेगा। अगर आप सफेद किसी कपड़े में पुखराज रखते हैं तो उस कपड़े के ऊपर पीली छाया नजर आने लगेगी।
• कमल के फूल की कली पर माणिक्य रखने से वह कली तुरंत खिल उठती है। इसके अलावा माणिक्य को किसी भी कांच के बर्तन में रखेंगे तो वह बर्तन आपको लाल दिखाई देगा।
• असली मूंगा को कांच पर रगड़ेंगे तो वह आवाज नहीं करेगा। इस पर हैड्रोक्लोरिक एसिड डालेंगे तो वह झाग छोड़ने लगेगा।
• लहसुनिया को अगर आप अंधेरे कमरे में रखते हैं तो उस पर रोशनी की एक किरण दिखाई देगी। किसी भी मजबूत चीज पर अगर आप इस पत्थर को रगड़ते हैं तो वह टूटेगा नहीं।
• इसी प्रकार अगर कोई पन्ना हरा ही नहीं है तो वह पन्ना भी नहीं है। अगर पन्ना असली है तो पानी के गिलास में उसे रखने के बाद गिलास में हरी किरण दिखाई देने लगेंगी। पन्ना पर कच्ची हल्दी लगाने से इस पत्थर का रंग लाल हो जाता है।
• असली गोमेद को गौमूत्र में रखने से 24 घंटे में गौमूत्र का रंग बदल जाता है। इस रत्न के बेहतर आपको बबल्स नजर नहीं आते।

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