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दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण, घटता जीवन

दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण, घटता जीवन

200 साल से ज्यादा अंग्रेजी की गुलामी का सामना करने के बाद जब देश में औद्योगिकरण का दौर आया, तब राजधानी होने के कारण दिल्ली के आस-पास कारखानों का निर्माण करना लाजिमी था। कारखानों का निर्माण होने के बाद दिल्ली की जनसंख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। दिल्ली में विकास के साथ-साथ इससे जुड़ी कुछ मूलभूत समस्याएँ मसलन आवास, यातायात, पानी बिजली इत्यादि भी उत्पन्न हुई। नगर में वाणिज्य, उद्योग, गैर-कानूनी बस्तियों, अनियोजित आवास आदि का प्रबंध मुश्किल हो गया। दिनों दिन बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली की आबोहवा जहरीली होती चली गई।

सर्दियों के दस्तक देते ही राजधानी दिल्ली का समूचा क्षेत्र धुंध से घिर गया है। साल दर साल गहरी होती जा रही ये धुंध अब लोगों के जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है। दिनों-दिन हालात ऐसे होते जा रहे हैं कि अपने गेट को भी करीब से देखना मुश्किल हो जाता रहा है। हालातों में परिवर्तन होने की बजाय दिल्लीवालों के लिए ये हवा बस जहरीली होती जा रही है।

दिल्ली की आबोहवा में कुछ सुधार हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखों पर बैन लगा दिया। पटाखों पर बैन लगने के बाद भी लोगों ने कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखते हुए पटाखे फोड़़े, हालांकि पिछले कुछ सालों के मुकाबले आंकड़े राहत प्रदान करने वाले हैं। लोगों के लिए खतरा बनती इस धुंध की तरफ सब अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं। चाहे प्रशासनिक अधिकारी हों या फिर सरकार, सभी आंखे मूंद कर बैठे हैं। दिल्ली में इस धुंध की वजह आसपास के खेतों में जलाई जाने वाली पराली बताई जा रही है, लेकिन न तो दिल्ली और न ही इन राज्यों की सरकारों ने इन्हें रोकने में कोई दिलचस्पी दिखाई।

सरकार की बात तो बाद में है, लेकिन वायुमंडल में फैलती जहरीली गैसों का रिसाव दमा, टीवी, और ह्रदय से पीड़ित रोगियों के लिये काफी हानिकारक है। आज भले ही सब कितने भी शिक्षित हो चुके हैं, पर दिल्ली में तेजी से फैल रहे प्रदूषण के लिए 80 फीसदी जिम्मेदार यहां के शिक्षित वर्ग के लोग ही हैं। अगर आप प्रदूषण से छुटकारा पाना चाहते हैं तो सभी लोगों को जागरूक करना होगा। हमें सभी को मिलकर बताना होगा कि स्वच्छ हवा, पानी हमारे जीवन का आधार है। इसके लिये हमें सभी को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए युवाओं और शिक्षित वर्ग के लोगों को आगे आकर काम करना होगा।

कहा जाता है कि जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है तो प्रलय आने की संभवानाएं बढ़ जाती हैं। उस देश में महामारी और अनेक प्रकार की बीमारियां अपना घर बना लेती हैं, क्योंकि जब वायुमंडल में हवा, पानी की शुद्धता नहीं होगी तो लोगों का जीना दुभर हो जाएगा। दिल्ली की हवा जिस तरह के दिन-प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है तो क्या ये आगामी विनाश के संकेत हैं।

 

 

 

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