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पद्मावती विवाद : ”भंसाली जैसे लोगों को सिर्फ जूतों की भाषा ही समझ में आती है”

पद्मावती विवाद : ”भंसाली जैसे लोगों को सिर्फ जूतों की भाषा ही समझ में आती है”

 संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसके विरोध में रोज नए नए बयान आ रहे हैं। अब इस विवाद में मध्यप्रदेश के उज्जैन से बीजेपी सांसद चिन्तामणि मालवीय भी शामिल हो गए हैंं। उन्होंने फिल्म को लेकर  एक  विवादित बयान दिया है। बीजेपी सांसद ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा है कि फिल्म निर्माताओं की स्त्रियां रोज शौहर बदलती हैं। उनको क्या पता कि जौहर क्या होता है। उन्होंने साथ ही लिखा है कि लीला भंसाली जैसे लोगों को सिर्फ जूतों की भाषा ही समझ आती है।

आपको बता दें कि इससे पहले फिल्म पद्मावती को लेकर बीजेपी के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उमा भारती और गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी विरोध जता चुके हैं। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने जहां पद्मावती विवाद को लेकर खुला खत लिखा था। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था अगर इससे भावनाएं आहत होंगी, तो लोग तो विरोध करेंगे ही। वहीं गिरिराज सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर निर्माताओं में हिम्मत है तो वह किसी अन्य धर्म को लेकर फिल्म बनाकर दिखाएं।

मीडिया खबरों के अनुसार, उज्जैन से बीजेपी सांसद चिन्तामणि मालवीय ने अपने फेसबुक बॉल पर एक पोस्ट लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि मैं फिल्म पद्मावती का विरोध करता हूं। साथ ही मैं अपने समर्थकों से अनुरोध करता हूं कि इस फिल्म का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि पैसे के लालच में इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना शर्मनाक है। उन्होंने लिखा है कि रानी पद्मावती हर भारतीय नारी की आदर्श हैं और पद्मावती पर हर भारतीय को गर्व है।

उन्होंने लिखा है कि रानी पद्मावती ने अपने अस्तित्व, देश की आन, बान, शान के लिए हजारों स्त्रियों के साथ खुद को आग के हवाले कर दिया था। जिसको तोड़ मरोड़ कर दिखाना देश का अपमान है। बीजेपी सांसद ने आगे लिखा है कि भंसाली जैसे लोगों को दूसरी भाषा समझ नहीं आती है। इनको सिर्फ जूतों की भाषा ही समझ आती है।

सांसद चिन्तामणि ने आगे लिखा है कि भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देश पद्मावती का अपमान नहीं सहेगा। उन्होंने लिखा है कि अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी कवियों ने इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। जिस पर लीला भंसाली ने फिल्म पद्मावती बना डाली। जो बहुत निंदनीय कार्य है। अभिव्यक्ति के नाम पर मानसिक विकृति सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने लिखा है कि जिन फिल्मकारों के घरों की स्त्रियां रोज अपने शौहर बदलती हैं, वे क्या जानें जौहर क्या होता है।

गौरलतब है कि क्षत्रिय समाज शुरू से ही इस फिल्म का विरोध कर रहा है। इसकी शुरुआत राजस्थान में फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। राजपूत समाज का कहना है कि लीला भंसाली ने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पद्मावती की कहानी को पेश किया जा रहा है। फिल्म में खिलजी और पद्मावती के कुछ इंटीमेट सीन भी जोड़े गए हैं। जिसके विरोध में राजस्थान सहित पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राजपूत समाज इस फिल्म के विरोध में लीला भंसाली के पुतले फूंक चुका है। राजपूत सामज के विरोध के बाद अब इस फिल्म के विवाद में राजनेता भी कूद पड़े हैं। जिसमें केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती और गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी विरोध जता चुके हैं।

 

 

 

 

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