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पोस्टमार्टम : क्या पश्चिम बंगाल सरकार को एक और हादसे का इंतजार है ?

पोस्टमार्टम : क्या पश्चिम बंगाल सरकार को एक और हादसे का इंतजार है ?

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार की नज़रों में लगता है, आम लोगों की और आम लोगों की जान की ज़रा भी परवाह नहीं है। आए दिन होते हादसें और इन हादसों में जाती आम नागरिकों की जान ममता सरकार पर कई सवाल खड़े कर रही है। हाल ही में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पूल गीर गया जिसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब कोलकाता में किसी पूल के गिरने की ख़बर आई हो इससे पहले भी 2016 में विवेकानंद पूल गीर गया जिसमें 27 मासूमों की जान चली गयी थी।

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मगर असंवेदन शीलता की हद तो यह है कि इतने हादसे होने के बाद भी ममता सरकार की कुंभकरण नींद टूटने का नाम ही नहीं ले रही। 2016 में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े विवेकानंद फ्लाईओवर का आज भी आधा हिस्सा मासूमों की जान लेने के लिए हवा में लटक रहा है। इस देश में आम लोग मुश्किलें सहने के लिए मजबूर है। विवेकानंद फ़्लाइओवर जिस इलाके में बना है उस इलाके के लोग आज भी खौफ के साए में जी रहे हैं। यह हादसा कोलकाता के इतिहास का सबसे भयानक हादसा था जिससे उभरने के लिए लोगों को एक महीने से भी ज़्यादा का समय लग गया था। हादसे के इतने साल गुज़र जाने के बाद आज लोग इसके आस-पास से गुज़रने में डरते हैं। फ्लाईओवर के हिस्से अभी तक लटक रहे हैं, वो कभी भी सिर पर गिर सकते हैं।

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आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश टाकीज और गिरीश पार्क के बीच का फ्लाईओवर का हिस्सा खराब डिजाइन, घटिया सामान और खराब काम की वजह से असुरक्षित है। रिपोर्ट में सरकार के ट्रैफिक सर्वे पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी सर्वे की बुनियाद पर विवेकानंद फ्लाईओवर बनाने के लिए 168 करोड़ के प्रोजेक्ट को 2008 में मंजूरी दी गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार शायद अब भी किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रही है। क्योंकि आम जनता तो महज़ वोट बैंक है।

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