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प्रियंका चोपड़ा को भारत में रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिए : बीजेपी नेता विनय कटियार

प्रियंका चोपड़ा को भारत में रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिए : बीजेपी नेता विनय कटियार

प्रियंका चोपड़ा को भारत में रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। यह बात हम नहीं वल्कि बीजेपी नेता विनय कटियार का कहना है। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला, दअसल फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा यूएन एंबेसडर के तौर पर रोहिंग्या शरणार्थियों से मिलने के लिए बांग्लादेश गईं थीं।

विनय कटियार ने रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए कहा कि वे दूसरों की जिंदगी छीन लेते हैं और लोगों का मांस भी खाते हैं। ऐसे लोगों को यहां नहीं रहने देना चाहिए, उनको इस देश से बाहर भगा देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘प्रियंका चोपड़ा को वहां नहीं जाना चाहिए था, ये उनका निजी फैसला हो सकता है, लेकिन ये सही नहीं है, जिन लोगों को रोहिंग्याओं से सहानुभूति है, उन्हें इस देश में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.’

सामने आया हिंदूओं की मौत का मामला

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि, पिछले साल रोहिंग्या आतंकियों ने हिंदू ग्रामीणों का विद्रोह के दौरान नरसंहार किया था। यह नरसंहार म्यांमार के रखाइन प्रांत में किया गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस खुलासे से इस बात का पता चलता है कि इस इलाके में किस हद तक जातीय संघर्ष फैला हुआ है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इस नरसंहार को 25 अगस्त, 2017 को अंजाम दिया गया था। जिस दिन ये हत्याएं हुईं ठीक उसी दिन रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा पुलिस नाकों पर भी घातक हमला किया गया था और यही कारण था कि देश उसके बाद से संकट की स्थिति से गुजरने लगा था।

रोहिंग्या मुसलमानों के हिंसात्मक प्रवृत्ति के कारण ही म्यांमार सेना ने रोहिंग्या विद्रोहियों पर कड़ी कार्रवाई की, जिसके बाद रोहिंग्याओं को देश छोड़कर जाना पड़ा। लगभग 7 लाख से ऊपर रोहिंग्याओं ने देश छोड़ा और उसके बाद उन्हें दर-दर भटकना पड़ा। यूरोप से लेकर एशिया तक कहीं भी उन्हें शरण नहीं मिली। भारत में भी रोहिंग्याओं के शरण का मसला समय-समय पर उठता रहा है लेकिन भारत सरकार के विरोध के बाद उन्हें यहां भी राहत नहीं मिल सकी है।

हालांकि यूएन ने रोहिंग्याओं पर कार्रवाई को लेकर म्यांमार की सेना की काफी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि म्यांमार सेना की हिंसक कार्रवाई के कारण रोहिंग्याओं की जाति का समूल नाश हुआ। रोहिंग्याओं की हत्या के पीछे म्यांमार की सेना और हिंसक भीड़ पर भी आरोप लगा कि इन दोनों ने मिलकर रोहिंग्याओं की हत्या की।

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