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आस्था

बुद्ध जयंती : पढ़ें भगवान बुद्ध के 10 अनमोल वचन

बुद्ध जयंती :  पढ़ें भगवान बुद्ध के 10 अनमोल वचन

देशभर में आज बुद्ध जयंती यानि बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाया जा रहा है। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का ये एक प्रमुख त्योहार है। इस त्योहार को हिंदू धर्म के लोग भी खूब धूमधाम से मनाते हैं। दरअसल, हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि भगवान बुद्ध विष्णु भगवान के 9वें अवतार हैं, इसलिए हिंदू भी इस त्योहार को उतने ही धूमधाम से मनाते हैं, जितना कि बौद्ध धर्म के लोग।

कहा जाता है कि गृहत्याग के पश्चात राजकुमार सिद्धार्थ यानि भगवान बुद्ध सत्य की खोज में सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहां उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से ये दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है।

भगवान बुद्ध ने अपने पूरे जीवनकाल में लोगों को कई अनमोल वचन दिए हैं। उनके वचन किसी खजाने से कम नहीं हैं। अगर हम अपनी जिंदगी में उनके दिए हुए वचनों को आत्मसात कर लें तो हमारा जीवन सुखी और समृद्ध हो जाएगा। आइए इस मौके पर जानते हैं भगवान बुद्ध के कुछ अनमोल वचन…

भगवान बुद्ध के 10 अनमोल वचन 

1. संदेह और शक की आदत से भयानक और कुछ नहीं होता। शक लोगों को अलग कर देता है। ये दो अच्छे दोस्तों को और किसी भी अच्छे रिश्ते को बर्बाद कर देता है।

2. क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है, इसमें आप ही जलते हैं।

3. अज्ञानी व्यक्ति एक बैल के समान है। वो ज्ञान में नहीं, सिर्फ आकार में बढ़ता है।

4. सत्य के मार्ग पर चलते हुए कोई व्यक्ति सिर्फ दो ही गलतियां कर सकता है। पहला ये कि वो पूरा रास्ता तय नहीं करता या दूसरा ये कि वो इसकी शुरुआत ही नहीं करता।

5. इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता। अगर आपकी एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरी इच्छा तुरंत जन्म ले लेती है।

6. किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए, क्योंकि जानवर तो बस आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुकसान पहुंचा सकता है।

7. आपके पास जो कुछ भी है, उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए और ना ही दूसरों से ईर्ष्या कीजिये। जो दूसरों से ईर्ष्या  करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती।

8. जिस तरह से लापरवाह रहने पर, घास जैसी नरम चीज की धार भी हाथ को घायल कर सकती है, उसी तरह से धर्म के असली स्वरूप को पहचानने में हुई गलती आपको नरक के दरवाजे पर पहुंचा सकती है।

9. कोई भी व्यक्ति बहुत ज्यादा बोलते रहने से कुछ नहीं सीख पाता, समझदार व्यक्ति वही कहलाता है जोकि धीरज रखने वाला, क्रोधित न होने वाला और निडर होता है।

10. चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे, जब तक आप उन्हें उपयोग में नहीं लाते?

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