आस्था

भूलकर भी मलमास की अमावस्या पर ना करें ये काम

भूलकर भी मलमास की अमावस्या पर ना करें ये काम

ये अधिकमास या मलमास का महीना है, माना जाता है इस समय बुरी शक्तियों का प्रभाव अपने चरम पर होता है। तभी इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता और पूजा-पाठ का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है।

13 जून को ज्येष्ठ माह की अमावस्या है, जाहिर तौर पर अधिकमास में अमावस्या का महत्व बहुत अधिक होता है। शास्त्रों के अनुसार जो जातक मलमास की अमास्या पर दान-पुण्य करते हैं उन्हें निश्चित रूप से इसका शुभ फल प्राप्त होता है। यह दिन जातक की हर इच्छा मनोकामना को पूर्ण करने वाला दिन माना गया है। इसके अलावा कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें इस दिन निषेध माना गया है। इसलिए जो महिला-पुरुष अपने और अपने परिवार के सुखद भविष्य की कामना करते हैं उन्हें ये कार्य कदापि नहीं करने चाहिए।

अधिकमास में वैसे भी नकारात्मक शक्तियां ज्यादा ताकतवर होती हैं, अमावस्या की रात उनका प्रभाव और तेज हो जाता है। इसलिए रात के समय कब्रिस्तान या श्मशान घाट के पास जाने से परहेज करना चाहिए।

जो लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं, ये शक्तियां उन्हें अपना शिकार सबसे पहले बनाती हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि ये शक्तियां आपका कुछ ना बिगाड़ सकें इसके लिए आपको मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के पश्चात ईश्वर का नाम लेना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।

इस दिन महिला-पुरुष को एक दूसरे के संसर्ग से बचना चाहिए। उन्हें एक दूसरे से दूरी रखनी चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार जो दंपत्ति अमावस्या या अन्य शुभ तिथि शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं उनकी संतान कभी खुशी नहीं रह सकती।

इसके अलावा तामसिक भोजन, लहसून-प्याज, मांस-मदिरा से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

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