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मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने वाले जज रवींद्र रेड्डी ने दिया इस्तीफा, जानें क्यों

मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने वाले जज रवींद्र रेड्डी ने दिया इस्तीफा, जानें क्यों

मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने वाले जज रवींद्र रेड्डी ने अपना इस्तीफा दे दिया हैं। खबरों की माने तो उन्होंने फैसला सुनाने के बाद इस्तीफा सौंपा दिया। उसके बाद वे छुट्टी पर चले गए है। हालांकि हाईकोर्ट ने अबतक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।

दरअसल, मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला सुनाने के बाद रेड्डी ने निजी कारण बताते हुए अपना इस्तीफा सौप दिया है। इस मामले में अब राजनीति भी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख ओवैसी ने ट्वीट कर कहा कि जज रविंद्र रेड्डी के इस फैसले से संदेह पैदा होता है। मैं उनके इस्तीफे के फैसले से हैरान हूं।

बात दें कि सोमवार को ही हैदराबाद के मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। हैदराबाद की स्पेशल एनआईए कोर्ट में हुई सुनवाई में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। दरअसल, एनआईए इनलोगों के खिलाफ कोर्ट में सबूत पेश नहीं कर पाई, जिस कारण कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया।
इससे पहले स्वामी असीमांनद को मक्का मस्जिद ब्लास्ट के आरोप में कोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी, जिसके बाद वो हैदराबाद जेल से रिहा हो गए थे।

गौरतलब है कि हैदराबाद की मुख्य मस्जिद में 18 मई 2007 को बम विस्फोट किया गया था। इस ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 58 लोग घायल हो गए थे। इस केस में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें असीमानंद का नाम भी शामिल था।

इस मामले की जांच NIA को सौंपी गई थी। एनआईए ने असीमानंद को भी इस ब्लास्ट का आरोपी बनाया था, जिसकी सुनवाई करते आज कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस मामले में एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।

बता दें कि इस मामले में 200 से ऊपर लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। साथ ही इस केस से जुड़े 400 से ज्यादा दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए थे। हालांकि इनमें से 64 गवाह बाद में कोर्ट में मुकर गए। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और झारखंड के मंत्री रणधीर कुमार सिंह भी शामिल थे।

साल 2011 में इस मामले में असीमानंद ने मजिस्ट्रेट के सामने ये स्वीकार किया था कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट में उनका हाथ था, लेकिन बाद में वो अपने बयान से पलट गए। उनका कहना था कि उन्होंने अपना पहला बयान एनआईए के दबाव में दिया था।

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