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माइग्रेन के भयंकर दर्द से छुटकारा दिलायेंगे ये नुस्खे

माइग्रेन के भयंकर दर्द से छुटकारा दिलायेंगे ये नुस्खे

माइग्रेन के भयंकर दर्द से छुटकारा दिलवाएंगे ये नुस्खे

माइग्रेन, सिरदर्द का एक गंभीर प्रकार है। भारत की कुल आबादी का लगभग 15% भाग तीव्र माइग्रेन से ग्रस्त है। आमतौर पर पुरुषों की तुलना में महिलाएं माइग्रेन से ज्यादा ग्रस्त होती हैं। एनएसएआईडीएस और दर्दनाशक दवाओं के जरिए माइग्रेन के दर्द को कम करना अल्पकालिक उपाय है

दवाइयों पर निर्भरता शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को भी खराब करती हैं। माइग्रेन से ग्रस्त मरीजों को वैकल्पिक चिकित्सा (बायोफीडबैक, एक्यूपंक्चर, सप्लीमेंट्स, मसाज चिकित्सा, विश्राम चिकित्सा) से फायदा हो सकता है, लेकिन यह सिर्फ तभी किया जाता है जब उनपर दवाइयों का कोई असर ना हो रहा हो।

आयुर्वेद में सिरदर्द को शरीर-मन-आत्मा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। माइग्रेन एक त्रिदोषिक स्थिति है। आयुर्वेद मूल कारणों को जानकर भीतर से रोग का इलाज करने में विश्वास करता है, इसलिए इसका उपचार पाचन और तंत्रिका तंत्र में विकृत दोषों को संतुलित करने के बाद किया जाता है।

आयुर्वेदिक उपचार में विशिष्ट आहार, तनाव प्रबंधन (ध्यान, विश्राम तकनीक, प्राणायाम, योग और मंत्र), हर्बल फ़ार्मुलों, जीवनशैली में संशोधन, पंचकर्म और अन्य समग्र रूपरेखाओं को निर्धारित करना आदि किया जाता है। शरीर और दिमाग के उपचार में पूर्ण संतुलन की स्थिति को लाकर बीमारी को हल किया जा सकता है। .

माइग्रेन – प्रमुख कारक

आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, माइग्रेन एक त्रिदोष विकार है, तीन दोषों में – कफ ,वात और पित्त दोष प्रमुख कारक हैं। कफ दोष के कारण त्वचा में सूखापन कब्ज बहुत तीव्र दर्द

पित्त दोष के कारण

थकान डिप्रेशन सुस्ती के साथ सिरदर्द

वात दोष के कारण

आंखों में लालिमा और जलन प्रकाश के प्रति अतिसंवेदनशीलता चिड़चिड़ापन नाक से खून बहना

आयुर्वेद के अनुसार माइग्रेन के अन्य कारण

तेल, मसालेदार या नमकीन भोजन का अत्याधिक सेवन लंबी अवधि के लिए सूर्य के प्रकाश में एक्सपोजर प्राकृतिक इच्छाओ को दबाना अधिक तनाव अपचता शराब या धूम्रपान का अधिक सेवन शारीरिक या मानसिक तनाव चाय या कॉफी का अधिक सेवन उपवास रखना हार्मोनल परिवर्तन खासकर पीरियड्स की अवधि के दौरान या गर्भनिरोधक गोलियों के अत्याधिक उपयोग के कारण नींद का अभाव

माइग्रेन का आयुर्वेदिक उपचार शिरोलेप:

सिरदर्द का इलाज करने में इसे अत्यधिक प्रभावी माना जाता है। यह एक विशेष तकनीक है जिसमें कुछ जड़ी-बूटियों जैसे चन्दन, कपूर आदि ठंडक प्रदान करने वाली चीजों का का पेस्ट बनाकर मरीजों के सिर पर लगाया जाता हैं।

शिरोधरा:

यह एक उत्कृष्ट आयुर्वेदिक चिकित्सा है जो तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव डालती है। इसमें तरल अधिकतर, गर्म तेल की एक पतली धार को माथे पर एक सतत धारा में डाला जाता है। इस क्षेत्र में तंत्रिकाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं।

कवल ग्रह:

आयुर्वेद में कवल ग्रह या तेल लगाने की विधि अत्यधिक फायदेमंद है। इसका एक बहुत ही शक्तिशाली डिटोक्सिफ्यिंग प्रभाव है और इसका स्वास्थ्य लाभ दांतों से लेकर माइग्रेन के सिरदर्द तक से राहत दिलाता है।

शिरोबस्ती –

ये एक अन्य प्रभावी आयुर्वेदिक चिकित्सा है जिसमे हमारे सिर के बाहरी क्षेत्र में एक चमड़े की टोपी पहनाई जाती है। टोपी के अंदर एक छेद का स्थान होता है ताकि औषधीय तेल (वात और पित्त दोषों को शांत करने के लिए ) एक निश्चित अवधि के लिए उस टोपी के छेद में ठहर सके।

स्नेहा न्यास –

यह उपचार नाक के माध्यम से किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के तेल को नाक में डाल दिया जाता है जैसे आप नाक में तेल की बूंदें डालते हैं।

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