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राजस्थान में गुर्जरों ने लिया 23 मई का आंदोलन वापस

राजस्थान में गुर्जरों ने लिया 23 मई का आंदोलन वापस

राजस्थान सरकार के साथ लंबे समय तक चर्चा करने के बाद गुर्जर आरक्षण आंदोलन समिति ने आखिरकार 23 मई को प्रस्तावित किया गया अपना आंदोलन अब वापस ले लिया है। शनिवार को हुई बातचीत में दोनों पक्षों के बीच कई बातों को लेकर समझौता हुआ है। इस समझौते के बाद रिटायर्ड कर्नल और समिति के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने विरोध प्रदर्शन को वापस लेने का ऐलान कर दिया। राज्य के मंत्री राजेंद्र राठौर ने बताया कि गुर्जर नेताओं के साथ यह बातचीत दो हिस्सों में हुई थी और यह करीब 10 घंटे तक चली।

उन्होंने कहा कि, ‘गुर्जरों की लंबित मांगों को एक तय समयसीमा के भीतर हल कर लिया जाएगा और इसका समय से निवारण सुनिश्चित किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण जे. सी. मोहंती को नियमित अंतराल पर प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है’

समिति के नेता हिम्मत सिंह ने बताया कि समुदाय की मांग के अनुसार सरकार ने ओबीसी कोटा के उप-विभाजन के लिए अपनी सहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘हम बीते 13 साल से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और इस बार आशावादी हैं कि हमारी मांगें पूरी हो जाएंगी, हालांकि, यदि समयसीमा के बाद वह हल नहीं होती है तो हम आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार का विरोध करेंगे.’

आपको बता दें कि, रोहिणी आयोग राजस्थान के साथ 4 अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को इस मुद्दे पर वार्ता करने के लिए 4 जून के दिन आमंत्रित करेगा। इसके साथ ही अपनी रिपोर्ट को भी जल्द ही जमा करेगा। केंद्र सरकार ने इस आयोग का गठन ओबीसी के वर्गीकरण के लिये किया था।

इससे पहले आरक्षण की मांग को लेकर 15 मई से गुर्जर समाज का आंदोलन शुरू हुआ था। जिसके बाद सोमवार को राजस्थान के भरतपुर में गुर्जर आरक्षण के मामले पर अलग-अलग दो गुटों की महापंचायतें हुई थी। जिनको आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देखा गया था। यही कारण था कि राज्य सरकार पहले से ही इस महापंचायत को लेकर पूरी तरह सतर्क थी। पिछले आंदोलन को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन भी पहले से अलर्ट पर दिखाई दिया था। इसके साथ ही प्रशासन और पुलिस के लिए भी निर्देश जारी किए गए। इसके चलते भरतपुर जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं और पूरे इलाके में धारा 44 लागू कर दी थी। इसके साथ ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

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