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मनोरंजन

वो मशहूर हस्तियां, जिन्हें नशे ने हमसे असमय ही छीन लिया

वो मशहूर हस्तियां, जिन्हें नशे ने हमसे असमय ही छीन लिया

‘नशा नाश कर देता है’ ये बात सिर्फ आम लोगों के ही नहीं, बल्कि मशहूर हस्तियों के जीवन पर भी लागू होती है। कई मशहूर सितारों का जीवन पुष्प असमय ही कुम्हला गया, वजह थी सिर्फ और सिर्फ बेतहाशा नशा। शायद ये मानवीय प्रवृत्ति है कि इंसान को एकांत और अवसाद को भुलाने का सबसे आसान तरीका नशा ही लगता है।

कई विलक्षण प्रतिभा वाली हस्तियों को अपने प्रशंसकों से भरपूर प्यार मिला। लेकिन, इसके बावजूद उनके जीवन में कहीं न कहीं कोई कमी थी। उसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने नशे का सहारा लिया। हालांकि, कमी को पूरा करने के लिए नशे का सहारा लेने की कीमत उन्हें असमय ही अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

आज हम आपको ऐसे ही कुछ नशे के शिकार हस्तियों के बारे में बताएंगे, जिन्हें नशे ने समय से पहले दुनिया छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

संजीव कुमार (1938-1985)

संजीव कुमार फिल्मी दुनिया के सबसे दमदार अभिनेताओं में से एक थे। उनकी एक्टिंग इतनी लाजवाब होती थी कि दर्शक उनके चेहरे से नजर ही नहीं हटा पाते थे। हरीभाई जरीवाला उर्फ संजीव कुमार शराब के शौकीन थे। हालांकि, शुरुआत में शराब की मात्रा नियंत्रित थी और वे पेशेवर शराबी के बजाय शौकिया शराबी थे। लेकिन, हेमा मालिनी से प्रेम में मिली असफलता और पारिवारिक परेशानियों के बाद संजीव कुमार पक्के शराबी बन गए। इसके अलावा उनके खानपान और जीवन शैली ने भी उनकी सेहत गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर अन्त में उनका भी वही अंजाम हुआ, जो अमूमन हर एक शराबी का होता है। उनका टूटा हुआ दिल, उन्हें दगा दे गया। 1985 में मात्र 47 साल की उम्र में उन्हें हार्ट अटैक का दौरा पड़ा। फिर ये कालजयी अभिनेता, अपने चाहने वालों की आंखों में आंसू छोड़ कर दुनिया को अलविदा कह गया।

सआदत हसन मंटो (1912-1955)

सआदत हसन मंटो की गिनती उन बेहतरीन लेखकों में होती है, जिन्होंने दुनिया की बीभत्स सच्चाई को बड़ी बेबाकी से कहानियों के माध्यम से लोगों के सामने रखा। उन पर अश्लीलता फैलाने का भी आरोप लगा। इसके बावजूद वे अपनी साहित्य साधना में लगे रहें। लेकिन, दुनिया के खोखले रीति-रिवाजों से लड़ने वाले मंटो, शराब और सिगरेट से नहीं लड़ पाए। उन्होंने अपने इन दोनों दुश्मनों से समझौता करके उन्हें अपने गले से लगा लिया। उनकी शराब और सिगरेट की आदत ने उन्हें अस्पताल से लेकर पागलखाने तक का सफर करवाया। उन्हें डॉक्टर्स ने कई बार शराब और सिगरेट से दूरी बनाने की सलाह दी, लेकिन वे कहते थे कि “जिंदगी अगर परहेज से गुजारी जाए तो एक कैद है और अगर बदपरहेजी से गुजारी जाए तो भी कैद है। यानि दोनों में कोई अंतर नहीं है। किसी न किसी तरह हमें जुराब के धागे (जिंदगी) का एक सिरा पकड़कर उधेड़ते जाना है बस।” अपने इसी उसूल की वजह से वे जिंदगी भर शराब नहीं छोड़ सकें। अपने लेखन से समाज को नंगा करने वाले मंटो सिर्फ 43 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए। शराब और टीबी की बीमारी ने उन्हें पूरी तरह खोखला कर दिया था।

हरिशंकर परसाई (1922-1995)

हरिशंकर परसाई को अगर भारतीय व्यंग्य विधा का भगवान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। समाज में फैली ऐसी कोई विषमता नहीं थी, जिसपर उनकी नजर न गई हो। उन्हें हर कोई हिन्दी जगत का सर्वश्रेष्ठ व्यंग्य लेखक मानता है। लेकिन, उन्हें भी शराब की लत लग गई थी। अपनी इस आदत के बारे में उन्होंने खुद कई जगह लिखा है। शराब ने उनकी सेहत को नुकसान तो पहुंचाया ही, साथ ही कई बार उन्हें शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ा। फिर भी वो अपनी इस खराब आदत को छोड़ नहीं पाए।

रांगेय राघव ( 1923-1962)

रांगेय राघव जैसे बेमिसाल लेखक को असमय ही खोने का अफसोस हिन्दी साहित्य जगत को हमेशा ही रहेगा। रांगेय राघव को सिगरेट पीने की बेहद बुरी लत था। उनके करीबी लोगों के अनुसार, उनका कमरा हमेशा धुंए से भरा रहता था। ऐसा लगता था कि जैसे अंदर चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा हो। रांगेय राघव के लिखने की रफ्तार काफी तेज थी। जितने समय में कोई आम आदमी कहानी पढ़ता है, उतने समय में कहानी लिख सकते थे। वे जब लिखना शुरू करते थे, तो कई दिन लिखते रहते थे। जब वो पढ़ना शुरू करते, तो कई-कई दिन पढ़ते ही रहते थे। लेकिन, साहित्य का ये पुजारी बेहताशा सिगरेट पीने की वजह से कैंसर का शिकार हो गया। जो इसके असमय दुनिया छोड़ने का कारण बना।

मोहन राकेश (1925-1972)

मोहन राकेश को उनकी दिल को छू लेने वाली कहानियों और नाटकों के लिए जाना जाता है। लेकिन, अद्भुत प्रतिभा के धनी मोहन राकेश की निजी जिंदगी भी किसी कहानी की तरह उलझी हुई थी। मोहन राकेश ने प्यार और सच्चे जीवनसाथी की तलाश में तीन बार विवाह रचाया। लेकिन, शायद उन्हें वो प्यार और अपनापन नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। लिहाजा, उन्होंने शराब और सिगरेट को अपने दामन से लगा लिया। फक्कड़ी स्वभाव के कारण कहीं टिककर नौकरी भी नहीं कर सकें। पारिवारिक उलझनों, आर्थिक परेशानियों और शराब-सिगरेट ने इस प्रतिभाशाली लेखक को अंदर से तोड़ के रख दिया। फलस्वरूप, मात्र 47 साल की उम्र में ही ये कालजयी कलमकार इस नश्वर संसार को छोड़ गया

मीना कुमारी (1932-1972)

मीना कुमारी को उनके गंभीर और संजीदा अभिनय के लिए जाना जाता है। लेकिन, उनकी निजी जिंदगी दुखों और त्रासदियों से भरी हुई थी। उनका वैवाहिक जीवन बेहद निराशाजनक था। मीना कुमारी ने कमाल अमरोही के लिए अपने पिता का घर छोड़ा। लेकिन, कमाल उन्हें वो प्यार और अपनापन नहीं दे सकें, जिसकी तलाश में मीना कुमारी अपने घर का तंग माहौल छोड़कर आई थीं। इसके बजाय कमाल ने उन्हें तीन तलाक दिया, बाद में हलाला करवाकर फिर से शादी भी की। ये मीना कुमारी के लिए बेहद त्रासदीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि अपनी मर्जी के खिलाफ किसी और पुरुष के साथ सोने के बाद वो स्त्री कहां रह गईं। वो तो वेश्या बन गईं। अपने दुख के थपेड़ों को मिटाने के लिए मीना ने शराब का सहारा लिया। वे अपने पर्स में शराब की छोटी-छोटी बोतलें रखने लगीं। एक बार अशोक कुमार ने उन्हें शराब से छुटकारे के लिए होम्योपैथी की गोलियां दीं, तो मीना कुमारी ने उसे खाने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, “दादामुनि, पीयूंगी नहीं तो जीयूंगी कैसे?” आखिरकार, ज्यादा शराब पीने के कारण उनका लीवर फेल हो गया। लीवर साइरोसिस की बीमारी की वजह से 1972 में मात्र 40 साल की उम्र में वे दुनिया को छोड़ गईं।

 

 

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