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सरकार की अदूर्दर्शिता के कारण छिन सकता है अन्तर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन

सरकार की अदूर्दर्शिता के कारण छिन सकता है अन्तर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन

शादी तय हुई तैयारियां हुई दूल्हा दुल्हन तय हुए, मंडप सजे बराती सजे और अब जब शादी का समय नजदीक आने वाला हुआ तो ऐसा लगता है कि शादी के पहले ही बसाने वाला संसार उजड़ जायेगा। ये बात है सूबे में नई गठित सरकार की अदूर्दर्शिता के कारण क्योंकि सूबे में जब सरकार का गठन हुआ तो देवभूमि को पर्यटन के मानचित्र पर उकेरने की जो कवायद सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और पूर्व पर्यटन सचिव ने की अब इस कवायद को बड़ा धक्का पहुंचने के साथ सरकार को भी बड़ा धक्का लगने वाला है।

आने वाले 2018 में औली और चमोली में अन्तर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होना है। जिसको लेकर व्यापक तैयारियों की समीक्षा बैठक भी हो गई है। अधिकारियों को दिशा निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। लेकिन विंटर गेम्स फेडेरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी एसएस पांगती ने इस सबके बावजूद कुछ ऐसा कहा है जिसके बाद अब सरकार के माथे पर बल पड़ना तय है। क्योंकि पांगती की माने तो पूर्व पर्यटन सचिव ने सूबे में पर्यटन के साथ रोजगार के अवसरों के लिए इस तरह के आयोजन का खाका तैयार किया था। इसके लिए विभाग से फ्रांस तक की यात्रा भी हुई थी। जहां से नई तकनीकि की जानकारी लेकर देवभूमि उत्तराखंड में इसे विकसित करना का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।

 

लेकिन सरकार ने अधिकारियों का फेरबदल कर अब एक नई कवायद को फिर से शून्य से शुरू कर अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी कर दी है। ऐसे हालात में तबादले कर दिए हैं जब गेम्स की तारीखें करीब आ गई हैं। दो से ढाई महीने का वक्त केवल बचा है जब तैयारियों का अंतिम स्वरूप प्रदान किया जाना है। ऐसे में बिना सिपहसालार के विभाग की तैयारियां तो बस नौ दिन चले ढाई कोस जैसी होगी। अगर ये तैयारियां अपने मानक के अनुसार ना हुई तो आयोजन के छिन जाने का खतरा भी अब राज्य सरकार के साथ विभाग को सताने लगा है। क्योंकि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर में अन्तर्राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों के आयोजन का प्रस्ताव भी भेजा है।

विशेषज्ञों की माने तो सरकार ने पूर्व सचिव के तबादले का फैसला बहुत ही जल्दबाजी में लिया है। इसका प्रभाव जहां खेलों की तैयारियों पर पड़ेगा, वहीं अगर आयोजन राज्य से छिनता है तो राज्य के साथ देश की भी अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर बहुत किरकिरी होना लाजमी दिख रहा है। लोगों का मानना है कि इस गम्भीर वक्त में तबादले के बाद की स्थितियां काफी भयावह हैं, क्योंकि आयोजन समिति को नए अधिकारी के आने का इंतजार करना है, इसके बाद शून्य से लेकर अब तक की स्थितियों को सामने रखना है। इसके बाद आयोजन की स्थितियों को देखना है तैयारियां देखनी है। अब तक ये सब कुछ खुल पूर्व सचिव के हाथ में था ऐसे में तैयारियों पर असर होगा अगर जांच समिति को खेल के आरम्भ के पहले तैयारियों पर कमी मिली तो आय़ोजन रद्द किया जा सकता है।

जिसका खामियाजा लम्बे समय तक राज्य को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि ऐसे खेलों में प्रतिभाग करने के लिए हमारे देश के खिलाड़ियों को विदेशों में मंहगे खर्च पर जाना पड़ता था। अगर इसका आयोजन यहां होता है तो उन्होने ओलम्पिक के लिए यहीं से टिकट मिल सकता है। लेकिन सरकार की ऐन मौके पर हुई तबादले का कवायद में खिलाडियों के साथ आम लोगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों के आयोजन से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ यहां पर नए रोजगार के अवसर भी आ जाते । इसी के चलते विंटर गेम्स फेडेरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी एसएस पांगती ने सरकार को अपने निर्णय पर पुन: विचार करने का अनुरोध किया है।

 

 

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