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सुप्रीम कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने रेप और हत्या के किशोर दोषियों को लेकर कही एक बड़ी बात

सुप्रीम कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने रेप और हत्या के किशोर दोषियों को लेकर कही एक बड़ी बात

आये दिन देश में रेप और हत्या के मामले सामने आते रहते हैं। जिसमें किशोर पर भी आरोप लगते हैं। इतना ही नहीं किशोर जब दोषी करार दे दिया जाता है तो उसके लिए मौत की सजा की मांग की जाती है। लेकिन क्या हर मामले में किशोर दोषी को मौत की सजा देना सही है? इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने बड़ी बात कही है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने रेप और हत्या के किशोर दोषियों को लेकर एक बड़ी बात कही है। जिसके बाद कुछ किशोर दोषियों को थोड़ी राहत मिल सकती है।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने कहा है कि रेप और हत्या के सभी मामलों में किशोर दोषियों को मौत की सजा नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि हर हत्या, हर रेप के मामले के लिए सिर्फ और सिर्फ  सजा-ए-मौत नहीं हो सकती। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि महज इस वजह से लिए कि कोई 17 साल का है या 18 साल का होने वाला है और जघन्य अपराध करता है, इसलिए उसे मौत की सजा दे दी जाए, ऐसा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आपको सबूत के आधार पर काम करना चाहिए और तब किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए। जस्टिस लोकुर शनिवार को यहां जुवेनाइल जस्टिस एक्ट-2015 के असरदार तरीके से लागू होने के विषय पर बोल रहे थे।

जस्टिस लोकुर ने कहा कि जब गहन अध्ययन किया गया तो पाया गया कि यौन अपराधों की सुनवाई करने वाली पॉक्सो कोर्ट उतनी अच्छी तरह कार्य नहीं कर रहीं, जितनी अच्छी तरह उन्हें करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुमशुदा बच्चों और बाल तस्करी के संबंध में बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना चाहिए।

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