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हरियाणा सरकार द्वारा अपनी मांगे पूरी ना होने पर दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म

हरियाणा सरकार द्वारा अपनी मांगे पूरी ना होने पर दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म

बात चाहे किसी भी राज्य की हो, हमारे देश में दलितों की परेशानी खत्म होनें का नाम ही नहीं ले रही है। सरकार से निराश होकर हरियाणा के जींद में करीब 120 दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया है. हरियाणा सरकार द्वारा अपनी मांगे पूरी ना होने पर इन दलित परिवारों ने दिल्ली के लद्दाख बौद्ध भवन में जाकर बौद्ध धर्म को अपनाया है।

आपको गौरतलब है कि दलित नेता दिनेश खापड़ का इस पर बयान आया है। उन्होनें कहा, “वह पिछले 113 दिनों से जींद में धरना दे रहे थे, लेकिन राज्य सरकार ने हमारी एक भी बात नहीं सुनी और कई बार हमारे समाज के लोग मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मिले, लेकिन सरकार की ओर से सिर्फ आश्वासन ही दिया गया, हम कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि जो सरकार ने वादे किए थे उन्हीं को पूरा करने के लिए कह रहे हैं”

क्या हैं इनकी मांग

इनकी मांगे ये थी कि गैंगरेप केस की सीबीआई जांच की जाए,  ईश्वर हत्याकांड के परिजनों को नौकरी दी जाए, जम्मू में शहीद हुए दलित परिवार को नौकरी दी जाए और इसके अलावा एससी/एसटी एक्ट में अध्यादेश लाया जाए।

आपको बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के बाद भी दलितों की नाराजगी देखने को मिली थी। जिसके बाद उन्होनें आंदोलन कर भारत बंद का ऐलान किया था। लेकिन धीरे-धीरे इस आंदोलन ने हिंसा का रूप ले लिया था और देखते ही देखते इस हिंसा में 11 लोगों की जान चली गई थी।

जानकारी के बता दें कि दरअसल, 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए एससी/एसटी एक्ट पर एक बड़ा फैसला सुनाया था, जिसको लेकर देशभर में हंगामा मच गया। आइए जानते हैं क्या था सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला, जिसको लेकर देशभर में हंगामा बरपा था…

क्या था एससी/एसटी एक्ट में बदलाव

एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले पर 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और एक गाइडलाइन जारी करते हुए कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज किए गए मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न की जाए बल्कि पहले इसकी जांच की जाए। जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने गाइडलाइन जारी करते हुए ये भी कहा था कि शुरुआती जांच 7 दिनों के अंदर आवश्यक रूप से पूरी हो जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक, विक्टिम (पीड़ित) द्वारा लगाए गए आरोपों की पहले डीएसपी स्तर की जांच होगी, उसके बाद अगर आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तभी आरोपी की गिरफ्तारी होगी और फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी के लिए भी पहले जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानि एसएसपी से लिखित अनुमति लेनी होगी। अब तक इस मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी करता था और एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपी की गिरफ्तारी भी हो जाती थी।

वहीं, सरकारी कर्मचारियों को भी इस गाइडलाइन के तहत रखा गया है। अगर कोई सरकारी कर्मचारी एक्ट का दुरूपयोग करता है और साथी कर्मचारी या सीनियर अधिकारियों पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाता है तो आरोपी को तुरंत गिरफ्तार न करके, पहले विभागीय अधिकारी से उसकी गिरफ्तारी के लिए अनुमति लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट का ये गाइडलाइन ये भी कहता है कि अगर कोई अधिकारी इस एक्ट का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तो होगी ही, साथ ही उसे कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना होगा।

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