धार्मिक

चरणस्पर्श एक परम्परा या विधान नहीं है, अपितु यह है एक विज्ञान   

धर्म,  Dharm भारतीय समाज में परिवार के बड़े-बुजुर्गों तथा संत-महात्माओं का चरणस्पर्श करने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस परम्परा के पीछे अनेक कारण मौजूद हैं।आइए जानते हैं इस परंम्परा के पीछे के कारणों के बारे में, हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि वरिष्ठ वयोवृद्ध जन के चरण स्पर्श से हमारे पुण्यों में वृद्धि होती है। उनके शुभाशीर्वाद से हमारा दुर्भाग्य दूर हो जाता है तथा मन को शांति मिलती है। बड़ों का चरण स्पर्श अथवा प्रणाम एक परम्परा या विधान नहीं है, अपितु यह एक विज्ञान है, जो हमारे मनोदैहिक तथा वैचारिक विकास से जुड़ा है।इससे हमारे मन में अच्छे संस्कारों का उदय होता है तथा नई पुरानी पीढ़ी के बीच स्वस्थ सकारात्मक संवाद की स्थापना होती है।चरण स्पर्श, प्रणाम-निवेदन करना अभिवादन भारतीय सनातन शिष्टाचार का महत्वपूर्ण अंग है, यह एक जीवन संस्कार है। प्रणाम-निवेदन म...

नगर कीर्तन और लंगर में उमड़े श्रद्धालु

धर्म, Dharm    टिकैत राय तालाब स्थित गुरुद्वारा बाबा बुड्डा साहिब जी में बाबा बुड्ढा जी का आगमन दिवस जोड़ मेले के रूप में मनाया जा रहा है।  गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि गुरुद्वारा प्रधान बलदेव सिंह परिहार  के संयोजन में कार्यक्रम के पहले दिन 19 अक्टूबर को प्रातः 6:00 बजे एक विशाल नगर कीर्तन गुरुद्वारा दुख निवारण साहब राजाजीपुरम से प्रारंभ होकर प्रातः 9:00 बजे टिकैत राय तालाब स्थित गुरुद्वारा साहिब पहुंचा, जहां पर गुरुद्वारा यहियागंज की तरफ से लंगर वितरित किया गया।      इस नगर कीर्तन में शहर की सभी धार्मिक सिख  संस्थाएं एवं  गुरुद्वारा साहिब शामिल थे नगर कीर्तन के आगे आगे गतका दल अपने करतब दिखा रहा था पांच प्यारों की अगुवाई में फूलों से सजी गाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी विराजमान थे।  20 अक्टूबर को 7:30 बजे से 11:00 बजे तक दीवान सजाया गया जिसमें पटियाला से आए रागी भाई ...

… तो ये थी रहस्यमयी रावण की अधूरी इच्छाएं

  धर्म के समाचार/Religion news   दशहरा त्योहार शुक्रवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। बुराई बुराई पर अच्छाई की जीत  के त्योहार के रूप में दशहरा मनाया जाता है। सर्वविदित है कि भगवान श्रीराम ने माता सीता को लंका से छुड़ाने के लिए रावण का वध किया था। लेकिन क्या आपको पता है कि रावण महान पंडित होने के साथ ही कुछ ऐसे असंभव काम को करने की क्षमता रखता था जिसे कोई नहीं कर पाता। हम आपको रावण के इस रहस्य को बता रहे हैं। जिसे जानकर आपको भी आश्चर्य होगा कि रावण कितना शक्तिशाली था।        भगवान शंकर का रावण परम भक्त था। इसलिए काल को भी उसने जीत लिया था। वह महापंडित और महाज्ञानी था। लेकिन अहंकार उसके अंदर आ गया था। इस वजह से वह खुद को भगवान से भी बढ़कर मानने लगा था। भगवान के बनाए नियमों को भी बदलने की ताकत रखता था। यही नहीं वह कुछ नियमों को बदलना भी चाहता था। यदि वह जीवीत रहता तो अपने इस कार्य में...

रावण के साथ बलात्कारी का भी जलेगा पुतला

  धर्म के समाचार/Religion news   आज देशभर में धूम धाम से दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा। मान्यता है कि दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का अंत किया था और माता सीता को अपने साथ लंका से लाए थे। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए मनाया जाना जाता है। बताते चलें कि रावण के साथ ही कुंभकरण, मेघनाथ का पुतला दहन भी किया जाता है। इसके लिए कई स्थानों पर पुतलों को जलाने के लिए तैयार भी किया जा चुका है। अब लोगों को उस समय का इंतजार है, जब बुराई को जलाया जाएगा। लेकिन इस बीच एक और रोचक बात जुड़ गई है कि रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के साथ ही ‘परिचित बलात्कारी’ का पुतला भी जलाया जाएगा। इस परिचित बलात्कारी का पुतला जलाने के लिए वोटिंग भी कराई गई है। जिसमें बढ़चढ़कर लोगों ने वोट भी किया है।        बताते चलें कि दशहरा त्योहार पर इस बार कुछ अलग और खास करने के लिए इंद्रप्रस्थ श्रीरामलीला कमेटी समाज...

यहां रावण दहन नहीं, उसकी पूजा होती है

धर्म के समाचार/Religion news   दशहरा त्योहार हिन्दू धर्म में धूमधाम से मनाया जाता है। गुरुवार को नवरात्रि की समाप्ति के बाद यह त्योहार 19 अक्टूबर को धूमधाम से देशभर में मनाया जाएगा। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करके अच्छाई पर बुराई की जीत को स्थापित किया था। इस दिन लोग रावण दहन करते हैं और भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि रावण महान पंडित और भगवान ​शंकर का भक्त था। यहां तक कि उसने अपने पराक्रम और प्रताप से इंद्र, यक्षों, नवग्रहों और तो और यमराज को भी बंदी बना लिया था। उसके इसी प्रताप के कारण आज भी भारत में स्थित इन 6 मंदिरों में पूजा भी होती है।        मान्यता है कि हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ कस्बे में रावण ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। इस कस्बे से होते हुए वह भगवान के शिवलिंग होकर लंका के लिए गुजरा था। हालांकि, यहां रावण का कोई मंदिर ...

नवरात्रि का पाना चाहते हैं शुभ फल तो पढ़े पूरी खबर

  धर्म के समाचार/Religion news   नवरात्रि का अंतिम दिन गुरुवार को है। नौ दिनों तक मां नव दुर्गा की सच्चे मन से भक्ति करने के बाद माता प्रसन्न होती हैं। माता के अंतिम स्वरूपों में देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माता सिद्धिदात्री नव दुर्गा का नौवां अवतार मानी जाती हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के नौवें दिन कन्याओं का पूजन करने के साथ ही भोजन कराने का विधान भी है। यदि नवरात्रि के अंतिम दिन आप कन्या भोज नहीं कराते हैं, तो आपका व्रत पूर्ण नहीं होता। ये नौ कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं।      दो वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को माता का रूप माना गया है। नवरात्रि के दिन नौ कन्याओं की पूजा और भोजन कराने का विधान सनातन से ही चला आ रहा है। माता नवदुर्गा ने अपने नौ स्वरूपों को जगत कल्याण के लिए धारण किया था और असुरों का नाश किया था। माता दुर्गा उपासना, दान व अन्य कार्यों से भी तभ...

नवरात्रि का पाना चाहते हैं शुभ फल तो पड़े पूरी ख़बर

  धर्म के समाचार/Religion news   नवरात्रि का अंतिम दिन गुरुवार को है। नौ दिनों तक मां नव दुर्गा की सच्चे मन से भक्ति करने के बाद माता प्रसन्न होती हैं। माता के अंतिम स्वरूपों में देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माता सिद्धिदात्री नव दुर्गा का नौवां अवतार मानी जाती हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के नौवें दिन कन्याओं का पूजन करने के साथ ही भोजन कराने का विधान भी है। यदि नवरात्रि के अंतिम दिन आप कन्या भोज नहीं कराते हैं, तो आपका व्रत पूर्ण नहीं होता। ये नौ कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं।      दो वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को माता का रूप माना गया है। नवरात्रि के दिन नौ कन्याओं की पूजा और भोजन कराने का विधान सनातन से ही चला आ रहा है। माता नवदुर्गा ने अपने नौ स्वरूपों को जगत कल्याण के लिए धारण किया था और असुरों का नाश किया था। माता दुर्गा उपासना, दान व अन्य कार्यों से भी तभ...

नवरात्रि के आठवें दिन करें महागौरी माता का पूजन, मिलता है अभय का वरदान

  धर्म के समाचार/Religion news   नवरात्रि के पावन नौ दिनों तक भक्त माता नव दुर्गा के स्वरूपों की सच्चे मन से उपासना कर पूजन करते हैं। मां दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी के रूप में विख्यात हैं। महागौरी माता की पूजा अर्चना से पहले हम आपको बता दें कि इस बार नवरात्रि पर तिथि में बदलाव के कारण भक्तों में असमंजस्यता की स्थिति बनी है। ऐसे में आज आप माता कालरात्रि और महागौरी दोनों ही माताओं का पूजन कर सकते हैं। दोनों माताओं की कृपा आप पर बनी रहेगी। वैसे तो नवरात्रि की अष्टमी 17 अक्टूबर दिन बुधवार को है। वहीं, ज्योतिष विशेषज्ञों की माने तो अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 16 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 16 मिनट से 17 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक है। माता महागौरी का तेज संपूर्ण विश्व में प्रकाशमान होता है। महागौरी ही आदि शक्ति हैं। माता की सच्चे मन से उपासना और विधि विधान से पूजा करने पर जीवन में सभी कष्ट दूर...

मृत्यु भय से छुटकारा पाने के लिए मां कालरात्रि को करें प्रसन्न, ऐसे करें पूजा

  धर्म के समाचार/Religion News   नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है। जिन भक्तों पर मां कालरात्रि की कृपा होती है, उनको मृत्यु का भय कभी नहीं सताता। अटल मृत्यु भी माता की कृपा से टल जाता है। काल से भी सुरक्षा करने के कारण माता को कालरात्रि कहते हैं। मां की सच्चे मन से पूजा करने पर सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं। किसी भी मुश्किल घड़ी में माता हमेशा साथ देती हैं। कभी भी शत्रु आप पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।        पंडित कृष्ण मुरारी मिश्र बताते हैं कि नवरात्रि के सप्तम दिन देवी मां को गुड़ का भोग लगाएं। सातवें दिन नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा होती है। मां कालरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले साफ सुथरी चौकी पर माता कालरात्रि की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बा...

कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करती हैं माता कात्यायनी, ऐसे करें प्रसन्न 

  धर्म के समाचार/Religion news   नवरात्रि के पावन महीने का आज छठवां दिन है। तिथि के अनुसार पंचमी तिथि और छठां दिन पड़ रहा है। ऐसे में मां नवदुर्गा के छठें स्वरूप कात्यायनी माता का दिन आज है। माता की सच्चे मन से पूजा करने पर सभी तरह के दुखों का नाश हो जाता है। कुंवारी कन्याओं के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो वह भी दूर हो जाती हैं। कात्यायनी मता की महिमा से घर मे हमेशा खुशहाली आती है। जो भी भक्त मां के इस छठें स्वरूप की पूजा सच्चे मन से करते हैं, उन पर माता दुर्गा की कृपा हमेशा के लिए बनी रहती है। माता की कृपा प्राप्त करने को लेकर सबसे अहम बात यह है कि पंचमी तिथि होने के कारण आप स्कंदमाता की पूजा अर्चना कर केले का भोग लगाकर आज भी खुश कर सकते हैं। इस दोनों माताओं की श्रद्धा भक्ति भाव से पूजा अर्चना कर आप आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आज का दिन अत्यंत ही फलकारक होगा।       मान्यता है ...

स्नेह और ममता की देवी स्कंदमाता को प्रशन्न करने के उपाय, जानिए क्या लगाएं भोग

धर्म के समाचार/Religion News   नवरात्रि के पावन महीने का आज पांचवा दिन है। पांचवे दिन स्कंदमात की उपासना की जाती है। स्कंदमाता को स्नेह और ममता की माता भी के रूप में भी जाना जाता है। ये स्वभाव से बहुत ही करुणामयी और दयालु हैं। भक्ति भाव से पूजा करने पर माता जल्द ही प्रसन्न हो जाती हैं। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता के बुलाते हैं।        स्कंदमाता दोनों हाथों में कमल के फूल को धारण किए हुए हैं। माता की चार भुजाएं हैं। उनकी एक भुजा हमेशा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए उठी हुई ही रहती है। वहीं, एक और हाथ में अपने पुत्र को गोद में बिठाकर पकड़ा हुआ है। माता हमेशा कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। कमल पर विराजमान होने के कारण ही माता को पद्मासना भी कहते हैं। माता का वाहन सिंह है।         पंडित कृष्ण मुरारी मिश्र बताते हैं कि नवरात्रि का पांचवा दिन यानि मां स्कंदमाता...

माता चंद्रघंटा को ऐसे करें प्रशन्न, नवरात्रि के तीसरे दिन होती है पूजा

  धर्म के समाचार/Religion news  नवरात्रि के पावन महीने का आज तीसरा दिन है। इस अवसर पर नौ दिनों तक माता दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। आज का दिन माता के भक्तों के लिए अत्यंत ही फलकारक है, क्योंकि तिथि के अनुसार मां चंद्रघंटा के साथ ही माता कूष्मांडा का भी दिन है। ऐसे में एक साथ माता के दो स्वरूपों  की पूजा का फल और भी बढ़ जाता है। माता चंद्रघंटा बहुत ही दयालु हैं। भक्तों पर जल्द ही खुश हो जाती हैं। माता का रूप बहुत ही सौम्य है। सुगंधित चीजें माता चंद्रघंटा को बहुत ही अधिक पसंद हैं। इस नाम से माता को इसलिए जाना जाता है, क्योंकि सिंह पर सवार होने के साथ ही मस्तक पर घंटे के आकार का अर्द्धचंद्र बना हुआ है। माता चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं और सभी भुजाओं अस्त्र-शस्त्र धारण किया हुआ है। वहीं, कंठ में सफेद फूलों की माला, दो हाथों में कमल का फूल, त्रिशुल, गदा जैसे अन्य शक्तिशाली अस्त्र-शस्त...

  • 1
  • 2
  • 4

Lost Password

Register