धार्मिक

इन मंदिरो में बप्पा करते है मुराद पुरी

धर्म के समाचार पूरे भारत में अनेक प्रकार के त्योहार और उनकी अपनी एक अलग ही मान्यता है। इसी कड़ी में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी काफी प्रमुख है। मान्यताओं कि माने तो इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। इस साल यह त्योहार 13 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस त्योहार की धूम भारत के सभी राज्यों में रहती है लेकिन महाराष्ट्र में इस त्योहार की रौनक ही कुछ अलग होती है। जहां एक ओर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की छठा देखने को मिलती है वही दूसरी ओर कुछ ऐसे भी मंदिर है जिनकी अपनी भी एक मान्यता है। उपरोक्त मंदिर के अलावा आप इस राज्य के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। इसलिए अब हम आपको अनेगुड्डे विनायक मंदिर के दर्शन करवाने जा रहे हैं। यह मंदिर कुंभारी गांव में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर में अगस्त्य ऋषि यहां यज्ञ करने के लिए आए थे। लेकिन उनके यज्ञ में विंघ्न डालने के लिए दैत्य कुंभासुर वहां आ गया...

शान से विराजेंगे गजानन, इस तरह की जा रही है गणेश चतुर्थी की तैयारी

धर्म  विघ्नहर्ता की पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती हैI  और मुसीबतों से छुटकारा मिलता है। अगर इस दिन की पूजा सही समय और मुहुर्त पर की जाए तो हर मनोकामना की पूर्ति होती है। फर्रुखाबाद में गणेश चतुर्थी पर रिद्धि-सिद्धि के दाता विघ्नहर्ता गणपति गजानन पूरी शान से विराजेंगे।       राजस्थान के कलाकार प्रथम देवता गणेश की प्रतिमाओं को पूरे भाव से तैयार करने में जुटे हैं। छोटी मूर्ति से लेकर 12 फीट तक की प्रतिमाओं को बनाकर उनमें आकर्षक रंग भरे जा रहे है| प्रशासन ने भी विघ्नहर्ता की पूजा के लिए पूरी तैयारी कर ली है।   आवास विकास तिराहे से नेकपुर के बीच राजस्थानी मूर्तिकार इस समय गजानन की मूर्तियों को अनुपम छटा देने में जुटे हैं। शुभ माने जाने वाले रंगों से प्रतिमाओं की सजावट की जा रही है। गणेश पांडालों में स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को बड़े रूप में बनाया गया है। सड़क किनारे लगी प्र...

Hartalika Teej 2018 : ऐसे बनायें इसे खास, जानें यहां

धर्म के समाचार/ RELIGION NEWS   हरतालिका तीज के मौके पर हर कोई सबसे सुंदर दिखना चाहता है। सजना-संवरना हर महिला को अच्छा लगता है, लेकिन जब हरतालिका तीज व्रत हो तो फिर आपको इस मौके को और खास बनाना चाहिए। मेकअप, मेंहदी, चूड़ी और साड़ी भी सबसे अलग हटकर होनी चाहिए।     बता दे कि हिन्‍दू धर्म को मानने वाली महिलाओं में हरतालिका तीज का विशेष महत्‍व है। सुहाग की लंबी उम्र के लिए हरतालिका तीज पर रखा जाता है। भारतीय संस्कृति में माना जाता है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है, उतना ही पति-पत्नी के बीच प्यार होता है। हरतालिका तीज व्रत के दिन अपने हाथों को मेहंदी से जरूर सजाएं।       हरतालिका तीज व्रत के मौके पर जितने जरूरी आपके कपड़े और मेकअप होते हैं, उतना ही जरूरी आपका हेयर स्टाइल भी है। अच्छा हेयर स्टाइल आपकी खूरसरती में चार चांद लगा देता है, इसलिए अपने बालों को एक नए स्टाइल से बनाएं। अगर आपको खुल...

पितरों को प्रसन्न करने वाली कुशग्रहणी अमावस्या कल

धर्म के समाचार/ RELIGION NEWS     कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुश ग्रहणी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है इसे देव पितृ कार्य अमावस्या आैर पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह अमावस्या 9 सितंबर 2018 रविवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन इस दिन व्रत और अन्य पूजन कार्य करने से पितरों की आत्मा को शान्ति प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव होता है, इसीलिए इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण आैर दान-पुण्य का अत्याधिक महत्व होता है। इस दिन कुश से पूजा की जाती है।      कुश ग्रहणी अमावस्या को विभिन्न प्रकार कुश से पूजा करने का विधान है। शास्त्रों में 10 प्रकार कुशों का उल्लेख मिलता है मान्यता है कि घास के इन दस प्रकारों में जो भी घास आसानी से मिल सके उसे पूरे वर्ष के लिए एकत्रित कर लिया जाता है। खास बात ये है कि सूर्योदय के समय घास को केवल दाहि...

आखिर जन्माष्टमी पर क्यों चढ़ाते है छप्पन भोग जानें

धर्म के समाचार   आज का दिन श्री कृष्ण के जन्मदिन के रुप में मनाया जा रहा है। आज पूरे भारत में इस त्योहार की धूम है। सभी मंदिर सजे हैं। लोग भगवान को प्रसन्न करने क लिए छप्पन भोग बनाते और उनकी पूजा में उन्हें शामिल भी करते हैं।   यह भी पढ़ें : श्री कृष्ण का सबसे प्रिय है मोर पंख जानिए मोर पंख को घर में रखने के फायदे   भगनाव को प्रेम और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। इसलिए लोग उनके जन्मदिन दिन से पहले ही उनके स्वागत की तैयारियां शुरु कर देते हैं। जगह-जगह पर झांकियां सजायी जाती है। इतना ही नहीं हिंदू संस्कृति में इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन की तैयारियों में मथुरा और वृंदावन में विशेष तैयारियां की जाती हैं। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और रात में भगवान के जन्म के बाद ही कुछ खाते हैं। भगवान श्री कृष्ण के बारे में एक कथा हमेशा से ही काफी प्रचलित है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को इ...

श्री कृष्ण का सबसे प्रिय है मोर पंख जानिए मोर पंख को घर में रखने के फायदे

 Religion news / धर्म के समाचार     वैसे तो सभी जानते है , हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर है। जिसे पुरे संसार में सबसे सुन्दर पक्षी कहा जाता है और यह सबसे शुभ पवित्र माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण का सबसे प्रिय आभूषण मोर पंख है। भगवान श्री कृष्ण के अलावा श्री गणेश और कार्तिकेय का भी यह प्रिय आभूषण है, और विद्या की देवी सरस्वती मां का वाहन मोर है इस कारण विद्यार्थी बच्चे मोर पंख को अपनी पुस्तकों के भीतर रखते है।  किसी भी व्यक्ति के पास या उसके घर में मोर पंख रहता है तो उस के साथ कोई भी अमंगल नहीं होता है,घर में मोर पंख को रखने से अनेक प्रकार के वास्तुदोष दूर होते हैं और सकारात्मक उर्जा को अपनी तरफ खीचता है। मोर पंख को वास्तु के अनुसार बहुत उपयोगी माना गया है, सुख-समृद्धि लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।    यह भी पढ़ें:भगोड़े माल्या को मुंबई कोर्ट से राहत, जवाब देने को मिला वक्त भगवान श्री क...

इस बार की जन्माष्टमी में द्वारपर युग का योग

धर्म के समाचार जानिए इस जन्माष्टमी का पौराणिक महत्व सिर्फ एमन्यूज इंडिया पर   जहां एक तरफ जन्माष्टमी को लेकर सभी जगह उत्साह देखने को मिल रहा है वही दूसरी ओर इसबार की जन्माष्टमी का योग द्वापर युग का माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के माने तो भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है। ठीक उसी प्रकार जब द्वारपर युग में कान्हा के जन्म के समय था।   यह भी पढ़ें : आखिर क्यों खाने से पहले करते है जल का छिड़काव   उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट के अनुसार, इस साल भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि दो-तीन सितंबर को दो दिन आने से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। ऐसे में लोगों में दुविधा है कि आखिर किस दिन पर्व मनाया जाए। ज्योति...

आखिर क्यों खाने से पहले करते है जल का छिड़काव

धर्म के समाचार   भारतीय परंमपराओं के अनुसार भोजन करने से पहले मंत्र का उचारण कर भोजन की थाल के आस-पास जल का छिड़काव करने का रिवाज है। जहां उत्तर भारत में इसे आचमन कहते है वही तमिलनाडू में इसे परिसेशनम के नाम से जाना जाता है। इस रिवाज के पीछे अन्न के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करना होता है। इसके साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि कोण से भी इस रिवाज को माना जाता है।   यह भी पढ़ें : तो दुर्योधन के समधी थे भगवान श्रीकृष्ण   अगर आज से पुराने जमाने की बात करी जाएं तो ज्यादातर लोग जमीन पर बैठकर खाना खाते थे। उनके घर कच्चे हुआ करते थे। उसी वजह से घर का फर्श भी कच्चा ही होता था। तो घर में कीड़े मकोड़े आना आम बात थी। कई बार फर्श की धूल उड़कर भोजन में ना पड़े इसलिए लोग खाना खाते समय थाली के आस-पास पानी छिड़क देते थे। ऐसा करना हमारी सेहत के लिए भी ठीक रहता है। भोजन की थाली के चारों ओर पानी छिड़क लेने से भोजन के आस...

… तो दुर्योधन के समधी थे भगवान श्रीकृष्ण

धर्म के समाचार/ RELIGION NEWS   महाभारत अनेक रोचक पौराणिक कथाओं का दुर्लभ ग्रंथ है। ऐसी ही एक कथा में पता चलता है कि नापसंद करने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ज्येष्ठ कौरव दुर्योधन से रिश्ते की मजबूत डोर से बंधे हुए थे। वास्तव में  दुर्योधन और श्री कृष्ण एक दूसरे के समधी थे। श्रीकृष्ण और उनकी रानी जाम्बवती के पुत्र साम्ब का विवाह दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से हुआ था। हांलाकि इस विवाह में कृष्ण जी की सहमति नहीं थी।    ये भी पढ़ें- सिर्फ धर्म ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है लाभप्रद, धरती मां को प्रणाम…   कथाओं के अनुसार राजकुमारी लक्ष्मणा और साम्ब एक दूसरे से प्रेम करते थे। ये संबंध ना तो दुर्योधन को स्वीकार था और ना ही कृष्ण को इसलिए लक्ष्मणा की सहमति से उसके स्वयंवर में साम्ब ने उसका हरण कर लिया। विशेष रूप से दुर्योधन तो कभी नहीं चाहता था कि यह विवाह हो लेकिन नियति को यही पसंद था। ...

सिर्फ धर्म ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है लाभप्रद, धरती मां को प्रणाम करना

धर्म के समाचार   भारत संस्कृति सभ्यता का देश है। उसी नाते घर के बड़े अपने बच्चों को कुछ न कुछ अच्छा ही सिखाना चाहते हैं। यह सभी संस्कार कहीं न कहीं हमारी माटी से जुड़े हुए हैं। यह सभी हमारी भलाई और हमारी तरक्की के लिए ही होते हैं।   यह भी पढ़ें : जानिए आखिर क्या है जन्माष्टमी का पौराणिक महत्व   हमारे बड़े हमें सुबह उठकर धरती को प्रणाम करना सिखाकर गए हैं। हमारे धर्म में सुबह उठकर धरती को प्रणाम करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि धरती हमारी पालनकर्ता है। हम सुबह से ही धरती मां को कष्ट देना शुरू कर देते हैं। हम धरती मां को प्रणाम करके उनके प्रति आभार व्यक्त कर सौभाग्य पा सकते हैं। आखिर इसके पीछे क्या महत्व औऱ उद्देश्य है? कहते हैं कि धरती दिनभर हमारा भार सहन करती है। इसलिए धरती को सुबह उठकर ही प्रणाम करना चाहिए। ऐसा करने से हमारा हमारे देश के प्रति प्यार बढ़ता है साथ ही धरती मां को हम अपना...

इस शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी, जानिए…

Religion /  धर्म । नटखट अदाओं से मन मोह लेने वाले भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन की तैयारियां शुरु हो गई है। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूर्व भारत में विशेष महत्व है। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन यानि 2 सितंबर और 3 सितंबर दोनों ही दिन मनाया जाएगा। 2 सितंबर को मंदिर और ब्राहम्णों के घर और 3 सितंबर को वैष्णव संप्रदाय के लोग इस महापर्व मनाते है। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। देश के सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन हर कोई बाल गोपाल के जन्म की खुशी में दिन भर व्रत रखते है। हर जगह कृष्ण की महिमा का गुणगान होता है। दिन भर घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन होते है। स्कूलों में श्रीकृष्ण का मंचन होता है और झांकियां निकाली जाती है। जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त- इस बार अष्टमी 2...

मां काली की होगी आप पर कृपा… बस करें ये उपाय

धर्म के समाचार/ RELIGION NEWS   माँ काली को माँ के सभी रूपों में सबसे शक्तिशाली स्वरुप माना गया है | भय को दूर करने वाली , बुद्धि देने वाली , शत्रुओं का नाश करने वाली माँ काली(Maa Kali) की उपासना से सभी कष्ट स्वतः ही दूर होने लगते है | माँ काली की आराधना शीघ्र फल देने वाली है | शास्त्रों में वर्णित है कि कलियुग के समय हनुमान जी , काल भैरव और माँ काली की शक्तियाँ जागृत रूप में अपने भक्तों का उद्धार करने वाली होगी | कुछ मान्यताओं के आधार पर माँ काली की उपासना केवल सन्यासी और तांत्रिक तंत्र सिद्धियाँ प्राप्त करने हेतु करते है | किन्तु यह पूर्णतया सत्य नहीं है | माँ काली(Maa Kali) की उपासना साधारण व्यक्ति भी अपने कार्य सिद्धि हेतु कर सकते है | किन्तु ध्यान रहे मंत्र उच्चारण या पूजा विधि में त्रुटी होने पर  माँ काली शीघ्र ही क्रोधित होकर आपको दण्डित भी कर सकती है | इसीलिए इनकी उपासना या मंत्र स...

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