धार्मिक

नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी पर्व 12 दिसंबर को  

धर्म, Dharm ।  ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी पर्व 12 दिसंबर को बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार से मनाया जा रहा है।  दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत आज शाम को 7:00 बजे रहिरास साहब जी के पाठ से हुई। इसके पश्चात श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए रागी भाई दविंदर सिंह जी एवं रागी भाई जुझार सिंह जी ने संगतों को शबद कीर्तन द्वारा निहाल किया। इसके पश्चात कथा वाचक ज्ञानी रंजीत सिंह गोहर ने गुरु महाराज की शहादत पर प्रकाश डालेगें । गुरु तेग बहादर साहिब जी ने बिहार, बंगाल, आसाम, उड़ीसा, बंगलादेष, उत्तर प्रदेश  आदि प्रान्तों की यात्रा की। श्री गुरू तेग बहादुर साहिब जी आसाम से वापस अनन्दपुर साहब (पंजाब) जाते वक्त बनारस अयोध्या  के रास्ते लखनऊ में सन 1670ई0 में  इस ऐतिहासिक  गुरूद्वारा श्री गुरू तेग बहादर साहिब जी, यहियागंज लखनऊ...

अगहन मास में श्रीकृष्ण देगे आशीर्वाद होगा सभी समस्याओ का अंत करे ये ख़ास उपाय  

धर्म, Dharm  माह में भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने वालों के सब क्लेश दूर हो जाते हैं। दुख-दरिद्रता से उद्धार होता है। जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो, वहां घर के लोग मार्गशीर्ष माह में इन मंत्रों का अधिकाधिक जप करें I   दुख या क्लेश के निवारण के लिए श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए 11 बार निम्नलिखित मंत्र का जप एकाग्रचित्त होकर करना चाहिए   संपत्ति प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन पढ़ें यह मंत्र ।     इस मंत्र का नित्य जप करते हुए श्रीकृष्ण की आराधना करें। इससे परिवार में खुशियां वापस लौट आएंगी।   जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए-   जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा हो या विवाह में विलंब हो रहा हो, उन कन्याओं को श्रीकृष्ण जैसे सुंदर पति की प्राप्ति के लिए माता...

साईं बाबा को चांद मिया के नाम से भी जाना जाता है    

धर्म, Dharm    के वरोधी उन्हें चांद मियां कहते है।  उनके मुताबिक वे एक मुस्लिम थे, और किसी भी हिन्दू को किसी भी मुस्लिम की पूजा नहीं करनी चाहिए। आइये हम बताते है कि चांद मिया आखिर थे कौन ? सांईं बाबा का जन्म महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी गांव में हुआ था। सांईं की माँ का नाम देवकी अम्मा और  पिता का नाम गोविंद भाऊ है। कुछ लोग उनके पिता का नाम गंगाभाऊ बताते हैं और माता का नाम देवगिरि अम्मा। गोविंद भाऊ और देवकी अम्मा के पांच पुत्र थे। पहला पुत्र रघुपत भुसारी, दूसरा दादा भुसारी, तीसरा हरिबाबू भुसारी, चौथा अम्बादास भुसारी और पांचवें बालवंत भुसारी थे। सांईं बाबा गोविंद भाऊ और देवकी अम्मा के तीसरे नंबर के पुत्र थे। उनका नाम हरिबाबू भुसारी था। साईं बाबा के माता-पिता के घर के पास ही एक मुस्लिम परिवार रहता था। उस परिवार के मुखिया का नाम चांद मिया था और उनकी पत्नी चांद बी थी। उन्हें कोई संतान नहीं...

प्यार को पाने के लिए करें यें  खास उपाय  

धर्म, Dharm  कमजोर शुक्र ग्रह को ऐसे करें  मजबूत, कीजिये ये उपाय    लोगों को ये महसूस होता है कि लोग उनको इग्नोर कर रहे हैं, वो  समझ नहीं पाते कि अपने आप को कैसे पेश करना है। अच्छा बर्ताव करने के बावजूद भी आपकी तरफ कोई आकर्षित क्यों नहीं हो रहा है। आइये जानते हैं, क्यों लोग आपसे प्यार नहीं करते।  दरअसल, आपका शुक्र ग्रह कमजोर है। केवल कुछ उपायों को करके आप अपना प्यार पा सकते है।    प्रेम और आकर्षण का है। यदि हम शुक्र का ये मंत्र नियमित रूप से करते है :- शुक्र मंत्र :  

जाने क्यों नहीं करते भद्रा काल में मंगल कार्यों की शुरुआत    

धर्म, Dharm    के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी तेज तर्रार  बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। इसलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है भद्रा? और क्यों इसे अशुभ माना जाता है? हिन्दू पंचांग के 5 प्रमुख अंग होते हैं। ये हैं- तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण। इनमें करण एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह तिथि का आधा भाग होता है। करण की संख्या 11 होती है। ये चर और अचर में बांटे गए हैं। चर या गतिशील करण में बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज...

जानिए क्यों काल भैरव ने काट दिया था ब्रह्मा का सिर? 

धर्म की खबरें/ religion News   कालभैरव भगवान शंकर के रुद्र अवतार माने जाते हैं। काशी से भैरव बाबा का संबंध बहुत ही खास होने के कारण यहां का उनको कोतवाल भी कहा जाता है। 29 नवंबर को बाबा काल भैरव की जयंती है। उनका जन्म मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। मान्यता है कि जिस किसी को भी काशी में रहना है, बाबा भैरव की आज्ञा लेना होता है। बिना उनकी आज्ञा के यहां कोई नहीं रह सकता। उनकी शक्ति का जितना बखान किया जाए कम है। उन्होंने एक बार श्रृष्टि के रचयिता ब्रह्म देव का सिर काट दिया था। इस घटना से स्वर्ग लोग में हड़कंप मच गया था। ब्रह्मा जी का शीष काट देने के कारण भैरव को ब्रह्म हत्या का पाप लगा था।       काशी नगरी का राज भगवान विश्वनाथ को माना जाता है। वहीं, भैरव बाबा को यहां का कोतवाल कहते हैं। भगवान विश्वनाथ का दर्शन तभी सफल होता है, जब पहले ही आप बाबा भैरव का अशीर्वाद प्राप्त ...

जाने कौन से अचूक उपाय से होगें आप के ग्रह प्रसन्न  

धर्म, Dharm    लगता है कि आपका कोई ग्रह आपकी जिंदगी में मुसीबत खड़ी कर रहा है तो आप खुशबू से इन ग्रहों  के बुरे प्रभाव को दूर कर सकते हैं। तो जानिए कि कैसे खुशबू से ग्रहों की शांति की जा सकती है।  – यदि आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह बुरे प्रभाव दे रहा है तो आप केसर या गुलाब की खुशबू का उपयोग करें। घर के लिए होम फ्रेशनर लाएं और शरीर के लिए इस खुशबू    का कोई इत्र उपयोग करें।  – चंद्रमा मन का कारण है अत: इसके लिए चमेली और रातरानी के इत्र का उपयोग कर सकते हैं।  – मंगल ग्रह की परेशानी से मुक्त होने के लिए लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा खुशबू का उपयोग कर सकते हैं। – बुध ग्रह की शांति के लिए चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।  – केसर और केवड़े का इत्र के उपयोग के अलावा पीले फूलों की खुशबू से गुरु की कृपा पाई जा सकती है। – शुक्र को सुधारने के लिए...

जानिए क्यों धरती पर देवता मनाने आते हैं दीवाली?

धर्म के समाचार/News of religion   हिन्दू धर्म में दीवाली त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करने के बाद माता सीता को लेकर अयोध्या पहुंचे थे। भगवान राम के अयोध्या पहुंचने पर यहां के लोगों ने घरों में दीपक जलाकर पूरी नगरी में रोशनी की थी। इस दिन माता लक्ष्मी भी घरों में पूजा पाठ का माहौल देखने आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि स्वर्ग से देवता भी दीवाली का त्योहार मनाने के लिए धरती पर आते हैं। बताते चलें कि दीवाली त्योहार के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग से देवता गंगा नदी के किनारे आते हैं। यहां सभी देवता दीवाली मनाते हैं। इसलिए इस दिन को देव दीपवली के नाम से भी जाना जाता है। देव दीपावली के दिन गंगा के घाटों और कुंडों की साफ-0सफाई की जाती है और किनारों पर दीया जलाया जाता है।      देव दीपावली का पर्व मनाने के लिए बनारस का विश...

आखिर क्यों इन जगहों में निकलता हैं गर्म पानी

  धर्म   आप ने बहुत सारी जगहों के बारे में सुना होगा,  लेकिन आज हम आपको ऐसी जगहों के बारे  बताने जा रहे है।  जहां से गर्म पानी निकलता है।  जी हां इन गर्म पानी में किसी भी तरह की मिलावट नहीं होती है। ये पूरी तरह से नेचुरल होता है। भारत में ऐसी कई जगह मौजूद हैं जहां गर्म पानी निकलता है। आइए जानते है   पनामिक सियाचिन ग्‍लेशियर पर स्थित एक छोटा सा गांव है।  जो लेह से 150 मीटर की दूरी पर स्थित है।  यहां की ऊंचाई समुद्र तल से 10,442  फीट है। यह स्‍थान गर्म पानी के कुंड के लिए भी प्रसिद्ध है।  साथ ही अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।          यहां पहुंचने के लिए, आपको केवल आपको एक लंबी ट्रेकिंग करनी होगी। ये  जगह अखरा बाजार, कुल्लू,  हिमाचल प्रदेश 175101 में स्थित है। खीरगंगा में जो गर्म पानी का कुंड है, वहां 12 महीने पानी गर्म रहता है।        ये हिमाचल प्रदेश में स्थित है। ये गर्म पानी कुंड ...

देवोत्थानी एकादशी पर करना है भगवान विष्णु को प्रसन्न तो करें ये उपाय

धर्म, Dharm   नातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि देवोत्थानी एकादशी से भगवान विष्णु जाग्रत होते हैं। पुराणों में वह मंत्र और श्लोक वर्णित है जिसे देव को उठाने के समय बोला जाता है।  वह दिव्य देव एकादशी को पुराणों में सभी व्रतों में महत्वपूर्ण बताया गया है। ये व्रत साल में 24 बार किया जाता है यानी एक महीने में 2 बार एकादशी का व्रत किया जाता है।    इनमें भी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवोत्थानी एकादशी और भी खास है। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की योग निद्रा से जागते हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करता है।  अर्थात- ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, सोम आदि से वंदनीय, हे जगन्निवास, देवताओं के स्वामी आप मंत्र के प्रभाव से सुखपूर्वक उठें। सनातन धर्...

लखपति बनना है तो कीजिये ये उपाय और वो भी रविवार और सोमवार

धर्म, Dharm    आप  अमीर बनना चाहते है तो करना होगा परिश्रम परन्तु भरपूर मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति की पर्याप्त आमदनी नहीं बढ़ पाती, और ना ही आय का नियमित स्थाई स्त्रोत नहीं मिल पाता । ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे साधारण से उपाय बताए गए हैं, की अगर कोई रविवार या सोमवार के दिन सूर्योदय से पूर्व एवं रात्रि में 10 बजे के बाद इस उपाय को दृढ़ विश्वास के साथ करता है तो उनके जीवन में इनकम का स्त्रोत स्थाई हो जाएगा, साथ ही हर क्षेत्र में बढ़ोत्तरी भी होने लगती हैं । ऐसे करें प्रयोग करें रविवार और सोमवार को ये उपाय । किसी भी माह में शुक्ल पक्ष के किसी भी रविवार एवं सोमवार के दिन सुबह 4 से 6 बजे के बीच में किसी शिवजी के मंदिर में साबुत बिना टूटे हुए सवा किलो चावल भगवान शिव के मंदिर लेकर जाएं, सबसे पहले दंडवत लेटकर प्रणाम करने के बाद कपूर जलाकर आरती करें । अब जो चावल साथ ले गये थे, उसे अपने दोनों हाथों...

मृत्यु भय से छुटकारा पाने के लिए मां कालरात्रि को करें प्रसन्न, ऐसे करें पूजा

  धर्म के समाचार/Religion News   नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है। जिन भक्तों पर मां कालरात्रि की कृपा होती है, उनको मृत्यु का भय कभी नहीं सताता। अटल मृत्यु भी माता की कृपा से टल जाता है। काल से भी सुरक्षा करने के कारण माता को कालरात्रि कहते हैं। मां की सच्चे मन से पूजा करने पर सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं। किसी भी मुश्किल घड़ी में माता हमेशा साथ देती हैं। कभी भी शत्रु आप पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।        पंडित कृष्ण मुरारी मिश्र बताते हैं कि नवरात्रि के सप्तम दिन देवी मां को गुड़ का भोग लगाएं। सातवें दिन नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा होती है। मां कालरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले साफ सुथरी चौकी पर माता कालरात्रि की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बा...

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