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SC : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार

SC : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सबरीमाला मंदिर में भी महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने इस मामले कहा कि अगर मंदिर में पुरुष जा सकते है तो महिलाएं क्यों नहीं जा सकती हैं।

आप को बता दें कि सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पांबदी वजह से याचिका दायर की गई थी। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था। इस मामले में हालांकि अभी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है और गुरुवार को भी इस मामले में सुनवाई की जाएगी।

किसी भी कानून की जरूरत नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा-

‘सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बारे में कोई कानून नहीं होने के बावजूद इस मामले में उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। मंदिर में प्रवेश के अधिकार के लिए किसी कानून की जरूरत नहीं है। यह कानून पर निर्भर नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है।’

जानिए क्या है मामला

सबरीवाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी हैं। मंदिर के अंदर 15 साल के ऊपर की लड़कियां और महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकती हैं। मंदिर के अंदर सिर्फ छोटी बच्चियां और वृद्ध महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे, इसी वजह से महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर रोक लगी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान अयप्पा भगवान शिव और मोहिनी के पुत्र थे। उन्हें हरिहरपुत्र के नाम से भी जाना जाता है।  दक्षिण भारत में इनके कई मंदिर है। उनमे से सबरीवाला मंदिर प्रमुख है। इस मंदिर को दक्षिण का तीर्थस्थल कहा जाता है।

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